फतेहपुर, शमशाद खान । मौसम परिवर्तन के साथ बढ़ रही गर्मी को देखते हुए पालिका प्रशासन ने यदि समय रहते पेयजल व्यवस्था का मुकम्मल इंतजाम न किया तो शहरवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ओवरहेड टैंकों एवं नलकूपों के जरिये घरों तक जलापूर्ति का प्रयास जलकल विभाग द्वारा किया जाता है। लेकिन तमाम ऐसे मोहल्ले हैं जहां हैंडपम्प ही सहारा है। लगभग 5 सौ हैंडपम्पों में 40 फीसदी तकनीकी खराबियों के कारण ठंूठ बने है। ऐसे में भीषण गर्मी के दौरान लोगों को पानी के लिये भटकना पड़ सकता है। शहर क्षेत्र की 3 लाख की आबादी में पालिका प्रशासन द्वारा तीन दर्जन से अधिक नलकूपों एक दर्जन ओवरहेड टैंकों एवं लगभग 5 सौ हैंडपम्पों के जरिये पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। इसके बावजूद इन संसाधनों से ग्रामीण क्षेत्रों वाले वार्ड अभी तक पूरी तरह से मुकम्मल नहीं हुए हैं अजगवां अंदौली, अधारपुर, उनवां नरायन, पुरवा जैसे कई क्षेत्र हैं जहां जलपूर्ति नहीं है। हैंडपम्पों के जरिये ही लोग पेयजल हासिल कर पा रहे है। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र वाले वार्डो में लगे हैंडपम्पों की देखरेख की जिम्मेदारी पालिका जलकल विभाग की है। परन्तु विभागीय शिथिलता के कारण 40 फीसदी हैंडपम्प पानी देने योग्य नहीं है। इनमें लगभग एक दर्जन रिबोर योग्य हैं तो शेष छोटी-छोटी तकनीकी गड़बड़ियों के चलते बेकार है। अधारपुर उनवां नगर पालिका परिषद में शामिल होने के बावजूद विकास से कोसी दूर हैं अच्छी खासी आबादी इस गांव में होने के बावजूद पेयजल समाधन लोगों के लिये नाकाफी है। पालिका प्रशासन द्वारा यहां कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यही हाल अन्य ग्रामीण क्षेत्रों का भी है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां पालिका प्रशासन द्वारा जलापूर्ति करना मुश्किल पड़ रहा है। वहीं शहर क्षेत्र में कुछ ऐसे वार्ड है जहां दो दशक बाद भी पेयजल आपूर्ति सही ंढंग से नहीं हो पा रही है। पालिका प्रशासन की खाऊ-कमाऊ नीति इन व्यवस्थाओं को धरातल पर लागू करने में बाधक है ंकुछ प्रयास भी समस्या के समाधान के लिये हुए लेकिन नतीजा शून्य रहा। शहर का चंदियाना ऐसा वार्ड है जहां दो दशक बाद भी घरों तक पानी पहुंचना सही तरीके से सम्भव नहीं हो सका है। अधिक ऊंचाई पर बसे होने के कारण जलापूर्ति कर सकना पालिका जलकल विभाग के लिये हमेश टेढ़ी खीर रही है। पालिका मे ंजिस तरह की सभासदों के मध्य खींचतान की स्थिति बनी रहती है उससे भी समस्या का समाधन सम्भव नहीं हो सका लगभग दस वर्षो से यहां के सभासद इस समस्या का समाधान तक नहीं करा सके। भले ही यहां की जनता दिक्कतें उठा रही हो लेकिन सभासद को अपने से ही मतलब रहता हैं यूं तो वह हो-हल्ला समस्या को लेकर मचाते है लेकिन दबंग सभासदों आगे उनकी बोलती बन्द हो जाती है ईओ रश्मि भारती का कहना है कि पहले जितनी समस्या थी उतनी अब नहीं हैं कुछ तकनीकी कारणों के कारण जलापूति बाधित होती है। जिसे सुधारने का प्रयास जारी है।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment