कानपुर : बहुत कम ही मिलती है, ऐसी नजीरे, अक्सर सरकारी सेवा में जाते ही वो व्यक्ति हो जाते है समाज से ऊपर अपने को मानने लगता है, उस पर अगर शीर्ष पर हो तो कहना ही क्या, लेकिन कई बार ऐसे मिथक टूटते भी दिखाई देते है, मामला डी. एम्. कानपुर का है, श्री कौशल राज शर्मा जो कि आला अधिकारी होते हुए चुनाव के दौरान लिए संकल्प ( शत प्रतिशत मतदान ) के लिए सिर्फ आदेश और आकड़ेबाजी के बजाये खुद जमीन पर उतर कर एक सिपाही की भूमिका निभाई, ये एक मिसाल और छुपा सन्देश उनके मतहतो के लिए कि वो यहाँ जनता के असली सेवक के रूप में है, और इसका असर जमीनी आंकड़ो या कहे हकीकत के रूप में सामने आया, पुरे प्रदेश में कानपुर नगर में सबसे ज्यादा दिव्यांग वोटरों ने हिस्सा ले कर मिसाल कायम कर दी, जिसका श्रेय श्री कौशल राज शर्मा के साथ समस्त टीम को भी जाता है, जिसने इस मिशन में कंधे से कन्धा मिलाकर इस लक्ष्य को हासिल किया, ये एक सन्देश के रूप में पूरे देश और जनता को भी लेना चाहिए, कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है
कानपुर : बहुत कम ही मिलती है, ऐसी नजीरे, अक्सर सरकारी सेवा में जाते ही वो व्यक्ति हो जाते है समाज से ऊपर अपने को मानने लगता है, उस पर अगर शीर्ष पर हो तो कहना ही क्या, लेकिन कई बार ऐसे मिथक टूटते भी दिखाई देते है, मामला डी. एम्. कानपुर का है, श्री कौशल राज शर्मा जो कि आला अधिकारी होते हुए चुनाव के दौरान लिए संकल्प ( शत प्रतिशत मतदान ) के लिए सिर्फ आदेश और आकड़ेबाजी के बजाये खुद जमीन पर उतर कर एक सिपाही की भूमिका निभाई, ये एक मिसाल और छुपा सन्देश उनके मतहतो के लिए कि वो यहाँ जनता के असली सेवक के रूप में है, और इसका असर जमीनी आंकड़ो या कहे हकीकत के रूप में सामने आया, पुरे प्रदेश में कानपुर नगर में सबसे ज्यादा दिव्यांग वोटरों ने हिस्सा ले कर मिसाल कायम कर दी, जिसका श्रेय श्री कौशल राज शर्मा के साथ समस्त टीम को भी जाता है, जिसने इस मिशन में कंधे से कन्धा मिलाकर इस लक्ष्य को हासिल किया, ये एक सन्देश के रूप में पूरे देश और जनता को भी लेना चाहिए, कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है

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