फतेहपुर, शमशाद खान । जनपद के मार्गों में दौड़ने वाले धड़धड़ाते-भड़भड़ाते टैम्पो-विक्रम अब यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर म्यूजिक थियेटर बन पहंुचा रहे हैं। कोई भी बीमार वृद्ध या महिला की परेशानियां इनके लिए कोई मायने नही रखती हैं। मार्गों पर दौडने वाले टैम्पो-विक्रम की हालत चाहे जितनी जर्जर हो, परन्तु इन वाहनों में डीवीडी प्लेयर व वूफर जरूर लगा होता है। जिसके जरिए यह तेज ध्वनि में ऐसे फिल्मी गीत बजाते चलते हैं जो कि महिला यात्रियो को शर्मसार करते हैं। इन गानों को टैम्पो-विक्रम के चालक जबरदस्ती यात्रियों को परोसते हैं। यदि किसी यात्री ने इन गानो का विरोध किया और चालक से यह कह दिया कि संगीत को बंद कर दो तो कहो वाहन रोक कर उस यात्री को उतार दें। ऐसा अक्सर होता है। लेकिन जिम्मेदार विभाग खमोश हैं। चालकों की इस मनमानी पर न तो एआरटीओ विभाग कोई कदम उठा रहा है और न पुलिस इस पर अंकुश लगा रही है। यात्रियों को मुफ्त में फूहड़ गीतों का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नही चैराहों पर खड़े टैम्पो-विक्रमों के चालक अपने-अपने वाहन में अधिक यात्रियों को बैठाने के लिए यात्रियों को पकड़ कर अपनी-अपनी तरफ खींचते हैं। इसी बहाने महिलाओं से अभद्रता भी करते रहते हैं। जिससे महिलाओं और चालकों के बीच आये दिन नोंकझोंक भी होती रहती है। यह नजारा शहर के किसी चैराहे पर भी जहां से विक्रम यात्रियों को बैठाते-उतारते हैं देखा जा सकता है। शहर के मार्गो पर दौडने वाले विक्रम म्यूजिक थियेटर में परिवर्तित हो गये हैं। जर्जर होने के कारण जहां यह वाहन ध्वनि प्रदूषण केा बढ़ावा दे रहे थे। वहीं अब फिल्मी गीतों के माध्यम से इस समस्या केा बढ़ाने के साथ-साथ यात्रियों के लिए भी परेशानी का सबब बन रहे हैं। यात्री मजबूरी में न चाहते हुए भी सफर के दौरान इन वाहनों पर बैठकर फूहड़ गीतों को सुन रहे हैं। आम यात्रियों की तो कोई बात नही है। लेकिन कार्य के बोझ से दबे व्यक्ति के साथ-साथ जो लोग बीमार एवं किसी समस्या से ग्रस्त होकर एक स्थान से दूसरे स्थान इन वाहनों के जरिए सफर करते हैं तो उनके लिए यह फिल्मी गीत कुछ इस कदर उबाऊ लगते हैं कि वह अपने कानों को बंद कर किसी तरह से जल्दी अपनी मंजिल आने का इंतजार करते रहते हैं। इतना ही नहीं सफर के दौरान महिला यात्रियों के साथ-साथ स्कूली छात्राओं को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। इन वाहनों के चालकों की एक आदत और है, जब वाहन में महिलाओं और छात्राओं की संख्या अधिक होती है तो अश्लील से अश्लील गीत तेज आवाज में बजाते हैं और वाहन की रफ्तार को भी बढ़ा देते हैं। यह सब महसूस करने की ही बात नही है। इन बातों पर जिसे यकीन न हो रहा हो वह शहर के मार्गों पर दौड़ने वाले विक्रम पर बैठकर इस हकीकत से स्वयं रूबरू हो सकता है। यह मनमानी शहर में दौड़ने वाले विक्रम चालकों की ही नही है बल्कि ग्रामीणांचलों में चलने वाले विक्रम और टैम्पों चालकों का भी यही हाल है। वह भी वाहन को स्टार्ट करने के साथ ही डीवीडी प्लेयर को आन कर देते हैं।
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