फतेहपुर, शमशाद खान। गेहूं की फसल को आखिरी पानी देने के लिये अब किसानों को ए़ड़ीचोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। एक बार फिर नहर ने किसानों को धोखा देने का काम किया है। विभाग की माने तो नरौरा बांध से उन्हे पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर पानी की पर्याप्त उपलब्धता कराये जाने की मांग की गयी है। हर बार की तरह एक बार फिर किसानों को नहर ने जोर का झटका दिया है। पल-पल बदल रहे मौसम से गेंहू की फसल को एक अतिरिक्त पानी की आवश्यकता है लेकिन किसानों को यह भी नहीं मिल पा रहा। पर्याप्त की उपलब्धता के चलते किसानों ने गेहूं की फसल तो बो डाली लेकिन अब वह कभी विभाग की ओर तो कभी आसमान की ओर झांक रहा है। नहरों में इतना भी पानी नहीं है कि किसान प्राइवेट संसाधनों से किसी प्रकार पानी निकाल कर फसल की सिंचाई कर सकें। किसानों की माने तो विभाग से कई बार पानी छोड़ने की गुहार लगायी गयी लेकिन विभागीय अधिकारियों ने हर बार हाथ खड़े कर दिये मौजूदा समय में नहरों में मात्र 4 सौ क्यूसेक पानी उपलब्ध कराया जा रहा है जो ऊट के मुंह में जीरा के समान साबित हो रहा है। वैसे तो निचली गंगा नहर व राम गंगा नहर को बारी-बारी से 15-15 दिन पानी उपलब्ध कराया जाता है लेकिन इस बार पूरे नियम कायदों को ही ताक में रख दिया गया। राम गंगा नहर को जहां 15 दिन चलाया गया वही निचली गंगा नहर को मात्र एक सप्ताह पानी देने के बाद ही बन्द कर दिया गया जिससे ऊपर वाले किसानों को तो पानी मिला लेकिन नीचे के किसानों को प्राइवेट संसाधनों से ही सिंचाई करना पड़ा। अचानक बढ़ी गर्मी से फसल को एक अन्तिम सिंचाई की आवश्यकता है लेकिन किसानों को ढूंढ़ से भी पानी नही मिल रहा। नहर की तलहटी पर बह रहा पानी इतना भी नही है कि प्राइवेट संसाधनों से उसे निकाल कर फसलों की सिंचाई की जा सके। अन्तिम समय में फसल को अकुलाते देख किसानों के चेहरों की हवाईयां भी उड़ी हुई है और वह खेतों से लम्बी दूरी पर स्थित तालाबों से पानी खींच कर खेतों तक पहुंचाने में जुटे हुए है। उधर निचली गंगा नहर अधिशाषी अभियंता वैभव सिंह एवं राम गंगा नहर अधिशाषी अभियंता महेन्द्र सिंह का कहना रहा कि नरौरा बांध से जितना पानी उपलब्ध कराया गया था वह किसानों तक पहुंचाने का पूरा प्रयास किया गया है। मौजूदा हालत में बांध से ही बेहद कम जलापूर्ति नहरों को दिया जा रहा है जिससे नीचे स्थित किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। समस्या को देखते हुए उच्चाधिकारियों से डिमाण्ड के मुताबिक नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग की गयी हैं जैसे ही पानी मिलता है। तो किसानों को पूरा पानी उपलब्ध कराया जायेगा। जो समस्या आयी है। वह मौसम मे ंहुए अचानक परिवर्तन से है। अधिक गर्मी की वजह से पानी देने की नौबत आयी है।
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