फतेहपुर, शमशाद खान । डिग्री परीक्षाओं में नकल माफियाओं की जोर जबरदस्ती के आगे छात्रों के हौसले पस्त है। ठेके पर हो रही नकल का नतीजा है कि नकल कराने के लिये कालेजों द्वारा धन उगाही के रेट निर्धारित कर दिये गये है। जो छात्र पैसा नहीं दे पा रहे है। उन्हे परेशान किया जा रहा है। और परीक्षा खराब होने के डर से वह अपनी पीड़ा किसी से बयां नही कर पा रहे है। हालात गरीब छात्रों के ज्यादा खराब है। जो उगाही जा रही मोटी रकम को न तो दे पा रहे है और न ही कालेजों के उत्पीड़न से बच पा रहे है। नकल माफियाओं की इस जोर जबरदस्ती पर प्रशासनिक अंकुश न होने से भी इनके हौसले बढ़े हुए है। जिले मे राजकीय व सहायता प्राप्त महाविद्यालयों को अगर छोड़ दिया जाये तो स्वावित पोषित महाविद्यालयों में नकल का बोलबाला है। नकल कराने के लिये परीक्षा से पहले ही पूरी कार्य योजना तैयार कर ली गयी और उसी के तहत अब काम किया जा रहा है। छात्र-छात्राओं से हजारों रूपये की नकल के नाम पर वसूली की जा रही है। हालात इतने खराब है कि पढ़ने वाला छात्र अगर नकल नही कर रहा है तो भी उसे नकल के लिये खोले गये शुल्क को अदा ही करना है अन्यथा महाविद्यालय के कर्मचारियों के द्वारा उसका मानसिक उत्पीड़न किया जाता है। नकल माफियाओं के हाल परीक्षा से पहले ही बदलने शुरू हो जाते है। प्रवेश के दौरान जिन छात्रों को प्रवेश लेने के लिये उनके द्वारा चिरौरी की जाती रही है। वही उनका शोषण उत्पीड़न करने को तैयार हो जाते है। प्रवेश पत्र देने से लेकर अंक पत्र देने तक हर जगह का शुल्क निर्धारित है। जिसके तहत छात्रों से पैसों की अवैध उगाही की जाती है न देने वालों का उत्पीड़न किया जाता है और उन्हें प्रवेश पत्र व अंक पत्र न देकर बार-बार दौड़ाया जाता है। परीक्षा के दौरान तो इनकी सेटिंग देखते ही बनती है। जिस तरह से विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में नकल माफियाओं की गिद्व दृष्टि लगी रहती है। उससे इनका कोई जोड़ नहीं। सामूहिक रूप से नकल करने से लेकर अलग बैठाने व निर्धारित समय से ज्यादा समय देने का अलग-अलग दाम निर्धारित है। निर्धारित शुल्क अदा कर नकल की सुविधा छात्र ले सकते है। हत तो तब पार हो जाती है जब कई महाविद्यालयों में तो काॅपी घर ले जाकर उसी दिन जमा करने की बड़ी सुविधा दी जा रही है। और इसके लिये अलग से निर्धारित शुल्क वसूला जा रहा हैं जिस तरह से नकल माफियाओं का डंडा चल रहा है उससे गरीब व होनहार पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं परेशान है। परीक्षा खराब करने की धमकी दी जा रही है और मनमाने तौर से इनसे वसूली की जा रही है।
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