फतेहपुर, शमशाद खान । सत्ता बदलते ही वाहनो पर झण्डा लगाकर रौब झाडने वाले लोग अब अपने वाहनो से पूर्व सरकार के पार्टी का झण्डा उतारकर वर्तमान सरकार के पार्टी का झण्डा निजी गाडियों में लगाना शुरू कर दिया है। जिन गाडियो में परिणाम से पहले साईकिल के झन्डे लगे थे उनमें लग गया केशारिया झंडा चार पहिया वाहनों में अपनी धाक व हनक कायम रखने के लिये लोग जो भी पार्टी सत्ता में आती है उसी पार्टी के निशान का झंडा लगा कर रूआब गाॅठने लगते है यह हाल है चार पहिया वाहन स्वामियो का गाड़ी चाहे छोटी हो या बड़ी पार्टी का झंडा लगाना कोई गलत बात नही लेकिन कुछ लोग ऐसे है जो पार्टी का झंडा केवल रूआब गाॅठने या फिर गलत काम कर के पुलिस की नजर से बचने के लिये सत्तासीन पार्टी का झंडा लगा कर अपने कार्यो को अन्जाम देते है कि पुलिस को उन पर शक न हो पा फिर पुलिस उनपर कोई कार्रवाई न करे या इस झंडे के दबाव में पुलिस उनके वाहन तो रोके नही और ऐसा अक्सर हो रहा है कि लग्जरी गाड़ियो से लगे इन सत्तासीन पर्टियों के झंडो से पुलिस व अधिकारी अक्सर चकमा भी खा जाते है और यह शातिर किस्म के लोग इन पार्टियो के झंडे लगा तर अपने अवैध कार्य भी करते रहते है। मेरी बात का यह मतलब नही की सभी झंडे लगी गाडियाॅ अवैध कार्य मे लगी होती है लेकिन कुछ शातिर किस्म के अपराधी व अवैध व्यापार करने वाले व्यापारी पार्टियों के झन्डे लगा कर पुलिस पर रौब गाठने के लिये और जमा तालाशी से बचने के लिये इस तरह झन्डे के हथ कन्डे का इस्तेमाल करते है और पुलिस व अधिकारियों को चकमा देने का काम करते है बहुत से वाहन स्वामी तो कागजो व अन्य वाहन की जाॅच से बचने के लिये इन झन्डो का इस्तेमाल करते है और सत्तासीन पार्टी के झन्डे का यह चमत्कार होता है कि वह झन्डा जिस मकसद से लगाया जाता है उन लोगो के मकसद पूरे हो जाते है जहाॅ परिणाम आने के पहले चार पहिया वाहनो में समाजवादी पार्टी की सरकार में साईकिल के झन्डे दिखाई देते थे वही परिणाम आने के बाद यह वाहन के स्वामियों ने भी रातो रात साईकिल के झन्डे को उतार कर भारतीय जनता पार्टी के कमल निशान का केशरिया झन्डा लगा फिर रोब गाॅठने के लिये लगा लिये और अब साईकिल के झन्डे नजरो से गायब अब वाहनो में नजर पड़ती है तो सिर्फ सत्ता सीन पार्टी के ही झन्डे पर पड़ती है।
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