फतेहपुर, शमशाद खान । यमुना नदी के समीप बसे गांवों एवं जंगली इलाको में कई दिनों से अपने को कथित वन कर्मी बताकर खुलेआम जंगली जानवरों का शिकार कर उनकी तश्करी कर रहे हैं जंगलों में घूम रही तथाकथित वन कर्मी टीम द्वारा खुलेआम जिस तरह आवरा पशुओं का शिकार किया जा रहा है उससे कहीं न कहीं खाकी सहित क्षेत्रीय नेताओं के संरक्षण की बात प्रकाश में आ रही है। मामले को लेकर क्षेत्रवासियों मे ंतरह-तरह की चर्चाए हो रही है। यमुना तटवर्ती इलाकों में बसे ग्रामों में रहने वाले गा्रमीणों के मुताबिक उनके ग्रामों के आस पास स्थित घने जंगलों पर आये दिन चार से पांच की संख्या मे ंऐसे लोग नजर आते है जो अपने को वन कर्मी बताकर विचरण करने वाले आवास जानवरों को साथ ले जाते है। इनके पास लाठी डण्डा से लेकर एअरगन व भारी मात्रा मे ंरस्सी मौजूद रहती है। कि बात ग्रामीणों द्वारा बतायी जा रही है तथाकथित वन कर्मियों द्वारा जानवरों के किये जा रहे शिकार को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। जिस बेखौफ अंदाज में आवारा पशुओं का शिकार एवं तश्करी की जा रही है उससे कहीं न कहीं खाकी के साथ क्षेत्री नेताओं का नाम प्रकाश में आ रहा है लेकिन उनके रौब के चलते कोई भी ग्रामीण मुंह खोलने के लिये तैयार नहीं है। शिकार करने के बाद जानकारों को सड़क किनारे खड़े वाहनों मे ंलाद दिया जाता है तथा उन्हें गैर जनपद के लिये रवाना कर दिया जाता है। ऐसा नहीं है कि इसकी खबर पुलिस को न हो लेकिन सब कुछ जानने के बावजूद इस ओर से वह जानबूझ कर मुंह मोड़े हुए है। तथाकथित वन कर्मी एक गांव से जानवार उठाने के बाद वहां पर हफ्तों तक नहीं जाते है। हर बार उक्त तथा कथित वनकर्मचारी अपना ठिकाना बदलते रहते है। क्षेत्र के रायपुर भसरौल के रहने वाले प्रेम नारायण निषाद, शिवबालक, रामऔतार आदि ने बताया कि अकेले उनके क्षेत्र से 5 भैस एवं दर्जनों की संख्या में पड़िया पड़वा बकरिया गायब हो चुकी है। इनका कहना है कि एक बार उक्त टीम के लोग हम लोगों को मिल गये जब उनसे बात बात की गयी तो बताया कि हल लोग लखनऊ दे आये है। हमारी तैनाती प्रदेश की राजधानी में है। खतरनाक-जानवरों की पहचान करके उसकी रिपोर्ट जिले के अधिकारियों को देते है। इन बातों की वजह से कोई शक नहीं हुआ।
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