फतेहपुर, शमशाद खान। भिटौरा विकास खण्ड के अन्तर्गत आने वाले ग्रामों को स्वास्थ्य सुविधायें उपलब्ध कराने व संक्रामक रोगों से निपटने के लिये तीस करोड़ की लागत से बना तीस शरया वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चिकित्सकों व चिकित्सीय स्टाफ की लापरवाही से तमाशा बन कर रह गया है यहां तैनात डाक्टर इसे सिर्फ पिकनिक स्टाफ समझ कर कभी कभार तफरी करने के इरादे से आ जाते है अन्यथा ज्यादातर डाक्टर नदारत ही रहते है। इस सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में कहने को तो ज्यादातर स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी व्यवस्थाओं का इंतेजाम है। चिकित्सकों की एक बड़ी फौज और भरा पूरा स्टाफ है जो ब्लाक क्षेत्र के अधिकांश गांवों के मरीजों की आवश्यकता के दृष्टिगत पर्याप्त है लेकिन यह सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। नाम के लिये सीएचसी में दर्जन भर के करीब डाक्टर तैनात है लेकिन कभी कभार ही कोई डाक्टर स्वास्थ्य केन्द्र के अन्दर मरीजों को डाटते भड़कते देखे जाते है। अन्य डाक्टरों का स्टाफ कहां नदारत रहता है इसका जवाब तो प्रशासनिक व स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर ही दे सकते हैं सीएचसी की जर्जर व्यवस्था यहां को डाक्टरों और स्टाफ की लापरवाहियों की कहानी सुनाती है। अस्पताल मे ंरक्त जांच समेत कई महात्वपूर्ण शारीरिक जांचों के पूरे इन्तेजाम है लेकिन यह जाचें कराई शहर से ही जाती है। कहते है कि कमीशन पचास फीसदी तय होने के कारण केन्द्र में रक्त जांच तो दूर की बात है सीएचसी की कुछ जिम्मेदारियों फार्मेसिस्टों के ऊपर भी है जो इतमिनान से दस ग्यारा बजे तशरीफ लाते है और कुछ मरीजों को लाल पीली दवायें देकर दो बजे इनकी खानगी हो जाती है कोई डाक्टर आया भी तो घन्टे डेढ घन्टे में ही चला जाता है। स्वास्थ्य केन्द्रों में शासनादेश के तहत वाला नही पड़ना चाहिये कि स्थानीय स्वास्थ्य केन्द्र शासन की इस व्यवस्था को मुंह चिढ़ता देखा जा सकता है। इस संर्दभ में सीएचसी प्रभारी से वार्ता करने का प्रयास किया गया तो उन्होने किसी भी प्रश्न का उत्तर सन्तोषजनक नही दिया।
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