फतेहपुर, शमशाद खान। जिले के स्वास्थ्य विभाग और ड्रगइसपेक्टर की उदासीनता और निष्क्रियता के चलते जिला मुख्यालय से लेकर कस्बों दहेतों तक के तमाम मेडिकल स्टोर नकली दवाओं से भरे पड़े है। जिन्हे गरीब व अनपढ लोगों को धड़ल्ले से दिया जा रहा है यह नकली दवाये बेच कर दवा विक्रेता मालामाल हो रहे है। और मरीज इन नकली दवाओं को खाकर आकाल ही काल के गाल मे ंसमा रहे है। जनपद के विभिन्न स्थानों में खुले स्टोरों पर जहां नकली व अद्योमानक दवायें खुलेआम बेची जा रही है यह नकली दवायें खासकर चिकित्सकों के पर्चे पर सांठगंाठ के चलते बेची जाती है। इन दवाओं की सबसे बड़ी खपत झोलाछाप डाक्टरों के सहारे है। होता यह है कि यह अद्योमानक दवाओं का मूल्य पेरेन्ट दवाओं से भी ज्यादा होता है। तथा वास्तविक कीमत से लगभग चार गुना से लेकर छः गुना तक होने से स्टोर मालिक को ज्यादा फायदा होता है। जिसके कारण डाक्टरों से सेटिंग करके इन दवाओं को मरीजों को थमा दिया जाता है। अद्योमानक दवायें तो बेची ही जाती है बल्कि कम्पनियों के नाम पर जेनरिक दवायें बेचकर स्टोर मालिक व इस धन्धे से लिप्त चिकित्सक मालामाल हो रहे है। इन दवाओं की बिक्री से जहां आम मरीजों को फायदा के बजाये नुकसान होता है। वही राजस्व की भारी पैमाने पर चोरी की जाती है। यदि मरीज इन दुकानदारों सेदवा की रसीद मागता है तो उसे नही दी जाती। नकली दवाओं कायह धंधा इस कदर परवान चढ़ा है कि अधिकाशं सरकारी चिकित्सक से लेकर झोलाछाप तक इसमें संलिप्त बताये जाते है। अद्योमानक दवाओं पर स्वास्थ्य विभाग शिंकजा कसने के बजाये सिर्फ मौन बना है और मरीजों के जीवन से खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment