फतेहपुर, शमशाद खान । शहर के वीआईपी रोड़ मे स्थित ताम्बेश्वर मंदिर के समीप संचालित सूर्यकमल ग्रुप आप निधि व म्यूचुवल कम्पनी के संचालक नटवरलाल ने लगाया उपभोक्ताओं को करोड़ों रूपये का चूना। जिस स्थान पर कभी यह कम्पनी संचालित हुआ करती थी आज वहां पर प्रधानमंत्री की कौशल विकास योजना का केन्द्र संचालित है। कम्पनी का संचालक शिक्षा विभाग से ताल्लुक रखता है तथा एक प्राइमरी स्कूल के हेड मास्टर के पद पर कार्यरत है। ठगी की दुनिया का मास्टर माइण्ड नटवरलाल ने कम्पनी का रजिस्ट्रेशन अपनी पत्नी के काम से करा रखा है तथा कम्पनी के बांड पर पत्नी की जगह खुद हस्ताक्षर करके लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना डाला है। इतना ही नही कम्पनी मे ठगी का शिकार बनाये गये लोगों के पैसे से एक जमीन का फर्जी बैनामा करा लिया था जिसके आरोप मे कम्पनी के संचालक नटवरलाल को जेल का भी सफर करना पड़ा था। बताया जाता है कि इस कम्पनी के संचालक ने अपनी दूसरी शाखा स्टेट बैंक कृषि शाखा के सामने खोल रखा था जिसमें पिछले दो महीने से ताला लटक रहा है। कम्पनी की ठगी का शिकार हुए लोग जब अपना पैसा वापस लेने के लिए जाते हैं तो उनको मुख्य शाखा मे कौशल विकास केन्द्र का कार्यालय नजर आता है और दूसरी शाखा मे ताला लटकता नजर आता है। इतना ही नही कम्पनी के संचालक ने उपभोक्ताओं को नम्बर दिये थे वह सारे नम्बर बंद बताते हैं। बताया जाता है कि ठगी की दुकान पर चादर ढकने के लिए कम्पनी के संचालक ने अखबार की दुनिया का सहारा लेकर एक समाचार पत्र का काफी दिन तक प्रकाशन किया किन्तु जेल जाने के बाद यह अरमान भी अधूरे रह गये। बताया जाता है कि इस कम्पनी से जुड़े उपभोक्ताओं का भुगतान का समय पूरा हो गया है और उपाभोक्ता लटकता हुआ ताला देखकर वापस लौट जाते हैं। बताया जाता है कि इस कम्पनी के ठगी का शिकार हुए हमीरपुर जनपद निवासी एक उपभोक्ता ने कम्पनी के नटवरलाल तथा कम्पनी के अभिलेखों मे संचालक के रूप मे दर्ज नटवरलाल की पत्नी के खिलाफ पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी किन्तु इतने दिन का समय बीत जाने के बाद भी कम्पनी के नटवरलाल तथा अभिलेखों मे दर्ज संचालक पत्नी के खिलाफ पुलिस ने कोई कार्यवाही नही की है। बताया जाता है कि शहर कोतवाली मे इस कम्पनी मे ठगी का शिकार हुए किसी उपभोक्ता ने शिकायत दर्ज नही कराई है इसलिए पुलिस ने भी इस मामले मे अपना दखल देना मुनासिब नही समझा है। बताया जाता है कि कम्पनी के नटवरलाल को एक और नटवरलाल का सहयोग प्राप्त होता था जिसने कम्प्यूटर से भी तेज अपने दिमाग का इस्तेमाल करते हुए खुद को माला माल कर लिया और एक जमीन का फर्जी बैनामा करवा कर नटवरलाल को जेल की हवा खिलवा दिया। प्राइमरी के हेडमास्टर से अकूत सम्पत्ति का मालिक बनने का सपना देखने वाले नटवरलाल के खिलाफ क्या कोई कार्यवाही होगी यह तो आने वाला समय ही बतायेगा।
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