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Sunday, 5 March 2017

जयन्ती पर याद किये गये राष्ट्रकवि पं. सोहनलाल द्विवेदी

फतेहपुर, शमशाद खान । राष्ट्रकवि पंडित सोहनलाल द्विवेदी की जयन्ती पर शहरवासियों ने उनके प्रतिमा पर मार्ल्यापण कर भावभीनी श्रद्धांजलि देने के पश्चात् एक गोष्ठी का आयोजन किया गया जिस पर कवियों ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए बहुचर्चित कवि का गायन किया गया।
राष्ट्रकवि पं0 सोहनलाल द्विवेदी की जयन्ती अवसर पर शहरवासियों ने रविवार को वर्मा चौराहा स्थित द्विवेदी चौराहा पर स्थापित प्रतिमा पर पूर्व चेयरमैन अजय अवस्थी की अगुवाई मे शहरवासियों एवं कवियों ने प्रतिमा पर मार्ल्यापण कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। तत्पश्चात प्रतिमा के निकट ही एक गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें कवि राजेश तिवारी ने पंडित सोहनलाल द्विवेदी की बहुचर्चित राष्ट्रवन्दना का गायन किया जिसमें वन्दना के इन स्वरों मे एक स्वर मेरा मिला लो, हो जहां बलि शीश अगणित एक सिर मेरा मिला हो व लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती। गोष्ठी के दौरान उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी सर्जना के बिन्दु देश प्रेम और चरित्र निर्माण ही रहे वह पूरे भारत के थे। जनता जनार्दन ने उन्हें राष्ट्रकवि की उपाधि दी वह अभिमानी नही स्वाभिमानी थे। साथ ही वह पत्रकार भी थे लखनऊ से अधिकार समाचार पत्र आजादी की लड़ाई मे कई वर्षों तक प्रकाशित किया। इस मौके पर डा0 सत्यनारायन मिश्रा, मधुसूदन दीक्षित, महेश चन्द्र त्रिपाठी, रमेश चन्द्र मिश्रा, राजेश चन्द्र मिश्रा, रामस्वरूप द्विवेदी, सुधाकर अवस्थी, सोहनलाल दीक्षित, पप्पू मिश्रा, राजेश तिवारी आदि बड़ी संख्या मे नगरवासी मौजूद रहे।

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