फतेहपुर, शमशाद खान । प्रदेश में पूर्ण बहुत से बनी बसपा तथा सपा सरकार के शासनकाल में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी भूमाफियाओं द्वारा खागा तहसील क्षेत्र में तालाबो तथा ग्राम समाज खाद के गड्ढे खलिहानो की जमीनों पर अवैध कब्जा करके अतिक्रमण करने वालों से यह सरकारी मशीनरी कब्जा नहीं हटा सकी है बल्कि कब्जा कराने में माहिर रही है। चुनाव के पहले तक तालाबी नम्बर तथा सरकारी जमीनो पर धुआधार कब्जा कराया गया हाजब भी कभी अभियान चला है तो अधिकारियों के लिए लूट घसोट का नया रास्ता बन जाता रहा है और झूठी रिर्पोट भेजकर इतिश्री पा ली जाती थी। जबकि सभी क्षेत्र के लेखपालों को मालूम है कि किस तालाब व सरकारी जमीन में किसका कब्जा है लेकिन जब वही लेखपाल धन की उगाही करके कब्जा कराया है तो क्या कार्यवाही कर सकता है। इस कारण से आज तक कब्जा नही हटा पा रहे है। देखना होगा कि भाजपा की नयी सरकार का सच कितना सही साबित हो रहा है। मालूम हो कि वर्ष 2007 में बसपा की पूर्ण बहुमत से प्रदेश में सरकार बनी इसके बाद वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी की भी पूर्ण बहुमत से प्रदेश में सरकार आ गयी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी तालाबी नम्बरो तथा खाद के गड्ढे ग्राम समाज के अलावा खलिहानो सहित अन्य सरकारी जमीनो पर कब्जा करके अतिक्रमण करने वालो से अब तक यह सरकारी मशीनरी खाली नही करा सकी है बल्कि धन कमाई के चक्कर में उक्त सभी प्रकार की सरकारी जमीनो में कब्ेजा कराने में माहिर रही है मजे की बात तो यह है कि विधान सभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के पहले तक उक्त सभी प्रकार की जमीनों व तालबों में पूरी तरह से अतिक्रमण कराया गया है नगर के तालाबी नम्बरो को देखा जाय तो यहां पर बड़ी बड़ी इमारते खडी हो गयी है क्योकि भाजपा की नयी सरकार के पहले की सरकार के शासन काल में अधिकारी कर्मचारी अतिक्रमण हटाने का काम कम करते थे बल्कि अतिक्रमण कराने का काम ज्यादा किया है यहां तक कि एक वर्ष पहले हरदो सलेमपुर पोली उकाथू खखरेरू धाता बैरी, सरौली कल्यानपुर कचरौली, कबरा ऐमापुर, भीमपुर, रक्षपालपुर सहित तहसील क्षेत्र के अन्य गावो में उक्त तालाबी नम्बरो सहित सरकारी जमीनो में पूरी तरह से अतिक्रमण बना हुआ है अतिक्रमण हटाने के नाम पर केवल मात्र खाना पूर्ति करके न्यायालय के आदेशो की धज्जिया उडाई जा रही क्योकि पूर्व की दो सरकारे के शासन काल में जिन तालाबों तथा सरकारी जमीनी से अतिक्रमण हटाया गया है और शासन को भेजी जाने वाली रिपोर्ट को देखा जाय तो वास्तविकता से परखा जा सकता है क्योकि इसके पहले जितनी भी बार अतिक्रमण हटाने का सिलसिला चला उसमें ज्यादातर झूठी हो रिपोर्ट जाती रही है क्योकि तालाबों का अतिक्रमण आज भी बोल रहा है लेकिन भाजपा की नयी सरकार बनने के बाद सुप्रीमकोर्ट के आदेशो को अच्छरसह पालन करने के पहले सरकार बने अभी एक सप्ताह भी नही पूरे हुए है लेकिन तालाबों से अति क्रमण हटाये जाने के लिए सरकारी मशीनरी की कडे निर्देश जारी कर दिये गये। जिस पर जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारियों को अतिक्रमण हटाये जाने के निर्देश दिये।
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