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Sunday, 26 March 2017

बूचड़खाने पर हुयी कार्यवाही से दहशत मे मांस कारोबारी

फतेहपुर, शमशाद खान । यूं तो सूबे के मंत्री आदित्यनाथ योगी ने प्रदेश के अवैध बूचड़खाने पर कठोरात्मक कार्यवाही करने के आदेश दिये हैं लेकिन जनपद मे मुख्यमंत्री के इस आदेश की दहशत मुर्गे, मछली व बकरे का मीट बेचनें वालों मे ज्यादा दिखाई दे रही है। हाल यह है कि मुर्गे का जो मीट पिछले सप्ताह तक 130 से 150 रूपये किलो तक आसानी से मिल रहा था आज उसी के रेट 250 रूपये प्रतिकिलो तक पहुंच गये हैं और इतना ही नही इसकी उपलब्धता भी बड़े ही मुश्किल से हो पा रही है। नगर पालिका व जिला प्रशासन के अतिक्रमण की कार्यवाही के बाद से इन लोगों मे ऐसी दहशत व्याप्त है कि दुकाने बमुश्किल ही खुल रही हैं। 
बताते चले कि चार दिन पूर्व ही बजरंग दल तथा विश्व हिन्दू परिषद ने मुख्यमंत्री को सम्बोधित एक ज्ञापन आला प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा था जिसमे उन्होंने आरोप लगाया था कि आम रास्ते पर मुर्गे व बकरे की मीट की दुकानों मे राहगीरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है तथा दुर्गन्ध के चलते संक्रामक बीमारियां भी पैर पसार रही हैं। ज्ञापन को गम्भीरता से लेते हुए जिला प्रशासन तुरन्त हरकत मे आया तथा उसने ऐसी दुकानों पर डण्डा चलाना शुरू कर दिया। मुख्यालय के साथ-साथ कस्बों तथा गांव तक से ऐसी दुकानों को साफ कर दिया गया। अधिकारियों से जब इस बावत सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वैध लाइसेन्स धारकों को कतई परेशान नहीं किया जा रहा इसके उलट जो लोग गलत तरीके से अतिक्रमण कर जगह-जगह मांस बेंच रहे हैं उन पर कार्यवाही की जा रही है। वहीं दुकनदारों ने नगर पालिका की शिथिल कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए कहा कि पालिका मे व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते लाइसेन्स लेना एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया है तथा जिला प्रशासन की कार्यवाही से न सिर्फ उनके रोजगार बल्कि उनके जीवन यापन मे भी सवाल खड़ा हो गया है। 
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही आदित्यनाथ योगी ने अवैध बूचड़खानों पर कार्यवाही करने के निर्देश दिये थे और हरकत मे आये पुलिस ने प्रदेशभर मे इसके विरूद्ध अभियान छेड़ रखा है। हालांकि मुख्यमंत्री ने मुर्गे व मछली की मांस की बिक्री को लेकर ऐसा कोई आदेश तो नही दिया लेकिन फिर भी जिला प्रशासन किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश नहीं रख रहा है। लगातार घट रहे कारोबार का असर शुक्रवार को बाकरगंज स्थित पशु बाजार मे भी देखा गया जहां औसतन 500 से लेकर 700 तक जानवर बिकते थे लेकिन इस सप्ताह इसके कारोबार मे भारी गिरावट देखी गयी। बाजार के संचालक नवाब जुगुनू ने बताया कि बमुश्किल 100 जानवर ही इस बार बिक पाया है वहां मौजूद व्यापारियों ने आरोप लगाया कि जगह-जगह पुलिस चेकिंग के साथ उनका उत्पीड़न करती है जिसके चलते जानवर नहीं आ रहे हैं। बताते चले कि इस बाजार मे कानपुर, कानपुर देहात, फरूखाबाद, कन्नौज, एटा, कौशाम्बी, रायबरेली, प्रतापगढ़ के अलावा प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों के भी व्यापारी जानवरों की खरीद फरोक्त के लिए आते हैं। दहशत का यह असर शनिवार को लगने वाली बकरी बाजार मे भी दिखा जहां व्यापारियों की तादाद काफी कम रही। बाजार मालिक गुलाम जाफर ने बताया कि कारोबार मे काफी फर्क पड़ा है तथा व्यापारी बाजार का रूख नहीं पा रहे हैं। 

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