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Thursday, 9 March 2017

प्रवचन में रास पंचाध्यायी व गोपी गीत के महत्व का किया बखान

फतेहपुर, शमशाद खान । पुष्टि मार्गीय सत्संग मण्डल शिव मंदिर रस्तोगीगंज में आयोजित पंच दिवसीय रासपन्वाध्यायी एवं गोपी गीत का प्रवचन करते हुए संगीतमय शैली में आचार्य चन्द्रकृष्ण शास्त्री ने श्रोताओं को श्री कृष्ण प्रेम में डबो कर आध्यात्म के दर्शन कराये। आचार्य चन्द्रकृष्ण शास्त्री ने श्रीमद्भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा कि यह दशमश स्कंध भगवान कृष्ण का ह्रदय है। और रास लीला भगवान के ह्रदय का पंच प्राण है और उसमे ंगोपियों द्वारा गया गया गीत प्रभु श्री कृष्ण की धड़कन है। बताया कि गोपी गीत आत्मा परमात्मा के मिलन का सर्वोच्च गीत है जिसमें रास मण्डल से रास करते हुए गोपियों के मन में सौभग्य मद (अहंकार) हो जाने पर गोपियों को छोड़कर अचानक श्री कृष्ण के अदृश्य हो जाने पर गोपियों द्वारा अन्वेषण क्रम में भगवान के नहीं मिलने पर यमुना जी के तट पर बैठ प्रेमात्मक प्रलाप द्वारा अपने दिव्य प्रेम की अभिव्यक्ति ही गोपी गीत है। बताया कि इसी दिव्य प्रेम में डूबी हुई गोपियों को छोड़कर जाना सूचक है कि भगवान को मान प्रिय है अभिमान नही। बताया कि पांचों अध्यायों में पांच प्रकार की जीवात्मा के ऊपर परमात्मा की जो कृपा हुई उसी प्रेम की पराकाष्ठा रास पंचाध्यायी में है। इस दौरान उमेश रस्तोगी, हर स्वरूप रस्तोगी, संजय रस्तोगी, कंचन रस्तोगी, रेनू रस्तोगी, गिरधर रस्तोगी, रवि रस्तोगी सहित तमाम लोग मौजूद रहे। 

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