फतेहपुर, शमशाद खान । बुनियादी सुविधाओं से दूर व विकास तथा समस्याओ के निस्तारणों से वंचित रहने वाले मतदाता इस बार न तो चुनाव पर न ही प्रत्याशी पर रूचि ले रहे है। इनके ऐसा करने के पीछे उनकी मूलभूत समस्याएं सामने खड़ी है। गंगा-यमुना तटवर्ती इलाको के अलावा विधानसभा क्षेत्रों के ग्रामीण मतदाताओं की माने तो इस बार के विधान सभा चुनाव में वे कोई दिलचस्पी नही ले रहे है और न ही प्रत्याशियों के प्रति कोई खास रूचि दिखा रहे है। यह अलग बात है कि घर आने पर वह दो शब्द वोल कर उनका सम्मान कर देते लेकिन जीत हार को लेकर चुप है। ग्रामीण अपनी सड़क, बिजली, पानी व किसान खाद, बीज सिंचाई की समस्याओं से जूझ रहे है। लोगों को पीने का शुद्व पानी मुहैया नहीं हो पा रहा है। जरूरी सुविधाओं के बाबत एक नहीं दर्जनों बार जनप्रतिनिधियों के समक्ष दुःखड़ा रोया लेकिन उनकी समस्याओं का निराकरण नही किया गया। शहर कस्बों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के सामने समस्याओं का अम्बार लगा हुआ हैं चुनाव के दौरान तो सभी दावे बड़े-बड़े करते है लेकिन जैसे ही समय निकल जाता है कोई पीछे मुड़कर देखने नही आता, अगर वही अगले चुनाव में प्रत्याशी रहा तो कभी अपनी सरकार न होने की बात तो कभी लाख तरह के बहाने सोचकर आता है। नये प्रत्याशी लोगों के सामने चुनावी लालीपाॅप चुनाव दर चुनाव दिखाने तो आ जाते है लेकिन जो वायदे उनके द्वारा किया जाता है उन्हें पूरा नही करते जिसके चलते मतदाताओं के बीच नाराजगी भरी हुई है।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment