फतेहपुर, शमशाद खान । विधान सभा के चुनाव में उम्मीदवारों के बीच भले ही इलाकाई मतदाता स्थानीय मुद्दो को उठाकर हैरत में डाल रहे हो लेकिन उम्मीदवारा उन मुद्दो को चुनाव जीतने के बाद ही निराकरण करने का वायदा कर रहे है। चुनावी माहौल ग्रामीण क्षेत्रों में अब गरमाता जा रहा है। गांव की चैपालों में बैठे लोग हुक्के की चिंगारी के साथ इलाके के विकास की कही बात उठा रहे है। तो कहीं जातीय समीकरण में इस बार भी सियासत का दांव पेंच शुरू है। जिले की सभी छह विधान सभा सीटों में तमाम ऐसे मुद्दे है जो कहीं न कहीं आम जनमानस को परेशानी के बीच डाले हुए है लेकिंन इन मुद्दो का निराकरण अभी तक नहीं हो सका। जिले की सभी छह विधान सभा सीटों में सियासत का रंग अब तेजी के साथ परवान चढ़ने लगा हैं सपा, बसपा भाजपा के उम्मीदवार जहां एक दूसरे पर आरोपो प्रत्यारोपो के बीच अपना चुनाव प्रचार तेजी के साथ चलाने की कोशिश कर रहे है। वहीं छोटे दलों के उम्मीदवारों का भी चुनावी सफर तेजी लाने लगा हैं सुबह से लेकर देर रात तक उम्मीदवार गांव के गालियारों में पहुंचकर गांव के बुजुर्ग लोगों से जहां आर्शीवाद ले रहे है। वही महिलाओं से भी अपने पक्ष में वोट देने की अपील कर रहे है लेकिन सत्रहवीं विधान सभा के इस चुनाव में इलाके का मतदाता उम्मीदवारों के बीच सीधे स्थानीय मुद्दो की समस्याओं को लेकर सवाल उठा रहे है। पानी, बिजली, सिंचाई जल निकासी के साथ-साथ शिक्षा, बेरोजगारी, ही मुख्य मुद्दे नहीं है बल्कि तमाम ऐसे मुद्दे है जिनकों लेकर पिछले चुनाव में जीते विधायकों ने निराकरण कराए जाने का वायदा किया था लेकिन जब चुने गये विधायकों के पास काम कराने की नौबाते आयीं तो उनके समर्थकों ने विकास की ऐसी रणनीति बनायी जहां पर अपने थे वहां पर आरसीसी सड़के दी गयी और इतना ही नहीं उन स्थानों में हैण्डपाइपो से लेकर तमाम तरीके की सुविधाएं मुहैया करायी गयीं जिनकी अन्य स्थानों पर कुछ ज्यादा ही आवश्यकताएं थीं। जिले की अयाह-शाह विधान सभा क्षेत्र में यमुना तटीय इलाके में तमाम गांव ऐसे जहां, आज भी लोगों को यमुना नदी का पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ता हैं बिंदकी विधान सभा क्षेत्र में भी कुछ ऐसे ही हालात हैं कस्बे के लोग विद्युत की समस्या से आज भी जूझ रहे है। किशुनपुर एवं हुसेनगंज विधान सभा क्षेत्रों में भी बिजली पानी, स़ड़क की किल्लत के साथ-साथ किसानों के बीच तमाम ज्वलंत समस्याएं आज भी पहले की तारीके ही खड़ी हुयी है। उधर जहानाबाद एवं सदर विधान सभा क्षेत्र की तस्वीरे भी किसी से छिपी नही है। कस्बे में बिजली का संकट के साथ-साथ सुगम यात्रा के लिये सीएनजी बसों की मांग, बन्द सरकारी नलकूप पीने के पानी व सड़कों की बदहाली का मुदा हमेशा उठता रहा है। शहर क्षेत्र की मुख्य सड़के देखकर लोग शहर में होने का अंदाजा नहीं लगा सकते। गर्मियों में विद्युत की अयोषित कटौती को लेकर व्यापारी हमेशा परेशान रहे है। अगर शहर की केवल बात की जाये तो लोगों के सामने जलनिकासी, ड्रेनेज, सफाई व सम्पर्क मार्गो, सड़कों की समस्याएं मुंह बाये खड़ी है। विधानसभा क्षेत्र में तो गंगा किनारे के गांवों के हालात और भी बदतर है।
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