फतेहपुर, शमशाद खान । आंगनवाडी केन्द्र सिंर्फ कागजो पर ही सिमट कर रह गये है। प्राथमिक विद्यालय साथ में लगने से केन्द्रों का आकलन नहीं हो पा रहा है। सरकार द्वारा जहां अलग से आंगनवा़ड़ी केन्द्रो के कक्षों का निर्माण कर दिया गया है। जिनमें ज्यादातर केन्द्रो पर जब नजर डाले तो ताले ही नजर आयेगे। मलवाॅ विकास खण्ड क्षेत्र की 66 ग्राम सभाओं में 116 आंगनवाड़ी केन्द्र खोलकर सरकार ने जहां तीन वर्ष से 6 वर्ष तक के बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा देकर उनके जीवन स्तर को ऊचा करने तथा हाट कुक योजना के माध्यम से पौष्टिक भोजन देकर उनके स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है वहीं इन केन्द्रो के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को भी पुष्टाहार देकर जच्चा एवं बच्चा के बेहतर स्वास्थ्य की मंशा को लेकर कल्याणकारी योजना संचालित की गयी हैं गरम पोषाहार योजना के तहत बच्चों को प्रतिदिन मीनू के हिसाब से दलिया, भुने चना, तले हुये चना, खीर, गुड़, लइया आदि प्रतिदिन दिया जाना है इस पौष्टिक सामग्री की खरीददारी भी आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को करना है किन्तु लोगों की मान तो गरम पोषाहार योजना सिर्फ कागजों पर गरमाहट के साथ जारी है। जबकि नौनिहाल बच्चे के पेट में यह गरम पोषाहार योजना पहुचना टेडी खीर साबित हो रही है। क्षेत्र के वयोवृद्ध शिवनाथ सिंह उर्फ बचुआ दादा, राकेश यादव एवं युवा वर्ग में योगेन्द्र सिंह, अविनाश सिंह एडवोकेट धर्मेन्द्र सिंह आदि लोगों ने लम्बे समय से मलवां बाल विकास परियोजना अधिकारी एवं सुपरवाइजरों के बीच फंसकर भ्रष्टाचार की भेट चढ़ी इस महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना की दम तोड़ी व्यवस्था पर गहरा दुख एंव रोष प्रकट करते बताया कि मलवां विकास खण्ड क्षेत्र में सरकार द्वारा खोले गये 116 आंगनवाडी केन्द्रों में शायद ही ऐसा कोई केन्द्र है जहां पर हाट कुक योजना एवं बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को वितरित होने वाला पुष्टाहार सरकार की मंशा के अनुरूप मिल रहा हो। उन्होने कहा कि बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को वितरित किये जाने हेतु मिलने वाली पंजीरी की बोरियां मलवां विकास खण्ड कार्यालय से उठकर केन्द्रो के बजाय सीधे खुले बाजार पहुचकर खुले आम धड़ल्ले के साथ बेची जा रही है। नौनिहालों एवं गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने हेतु सरकार द्वारा वितरित की जाने वाली पौष्टिक पंजीरी भ्रष्टाचार की भंेट चढ़ गाय एवं भैंसो को स्वास्थ्य लाभ पहुंचा रही हैं इस संचालित योजना का सबसे दुखद पहलू यह है कि इस योजना को बदसूरत बनाने में अहम भूमिका अदा करने वाली मां के ममत्व को दर्शाने वाली महिलाएं ही है। इस क्षेत्र में तमाम ग्राम प्रधानों ने सीडीपीओ एवं सुपरवाइजरों द्वारा प्रत्येक आंगनवाड़ी केन्द्रो में प्रतिमाह 1 हजार रूपये की उगाही किये जाने की सीधा आरोप लगाया इतना ही नहीं कई आंगनवाडी कार्यकत्रियों ने अपना नाम न छापने की शर्त पर पैया दिया जाना स्वीकार किया है।
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