फतेहपुर, शमशाद खान । किशुनपुर के यमुना नदी में बने पीपे के पुल पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। जान को जोखिम में डालकर ओवर लोड़ वाहनों का आवागमन हो रहा है। सम्बन्धित अधिकारी व कर्मचारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे है। यमुना नदी में बने प्लाटून पुल की रेलिंग और लकड़ी पटरे टूटे है। पुल के दोनों ओर कोई सपोर्ट तार नही लगी हुयी है। चकर प्लेट, लोहे का पटरा नदी के बालू में बीच-बीच डाले गये हैं। जिसमें से कई प्लेटे ठीक भी नही है। जिसके चलते वाहन चालक अक्सर टावर पंचर का शिकार हो जाते है। चूंकि प्लोटों के फटे हुए कोने सीधे टायरों को अपना निशाना बनाते है। ऐसी हालत में वाहन चालकों के समक्ष बालू के रेत से वाहनों को निकालने की मजबूरी बनी रहती है। इस पुल से रात दिन वाहनों का आवागमन बना रहता है। चार पहिया वाहनों के साथ-साथ भारी वाहन भी इस पीपे के पुल से निकाले जाते है। इस पर अंकुश लगाने के लिये ड्यूटी पर रहने वाले पुलिस कर्मी एवं पुल से सम्बंन्धित कर्मचारी पूरी तरह से मूक दर्शक बने रहते है। यह पुल यमुना पार स्थित बांदा, चित्रकूट व मध्य प्रदेश के जिलों को जोड़ता है। खास बात तो यह होती है कि पैदल रहागीरों से थी पत्थर वसूला लिया जाता है। जबकि शासन हाटा पूर्व घोषणा की गयी थी कि आवागमन पर पुलों पर पथकर पूरी तरह से निःशुल्क रहेगा। पुल पर मौजूद ओमप्रकाश जो कि न केवल पुल से सम्बंन्धित कर्मचारी है। वरन निकलने वाले वाहनों से पर्ची के माध्यम से वसूली करता है। का कहना है कि हमारे पास ऐसा कोई आदेश नहीं है।
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