फतेहपुर, शमशाद खान । जिले की अयाह शाह विधानसभा सीट सबसे अहम मानी जा रही है इस सीट पर भाजपा के पूर्वमंत्री राधेश्याम गुप्त के पुत्र विकास गुप्त जहां चुनावी मैदान पर हैं तो वहीं समाजवादी पार्टी ने अयोध्या प्रसाद पाल को चुनावी मैदान मे उतार रखा है। कभी यह सीट बहुजन समाजपार्टी के खाते पर हुआ करती थी यहां पर इस बार के चुनाव मे बहुजन समाजपार्टी ने तेज बहादुर सिंह को चुनावी मैदान मे विरोधियों को सिकस्त देने के लिए उतार रखा है। सबसे खास बात यह है कि चुनावी जीत के समीकरण मे केवट विरादरी का वोट प्रत्याशी के लिए निर्णायक होता है इस विरादरी के मतदाताओं को मनाने के लिए दो दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव मे देखी जा रही है जहां एक ओर भारतीय जनता पार्टी से सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति इस सीट की जीत के लिए लगातार मेहनत करने मे अपने को पीछे नहीं रख रही हैं तो वहीं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विशम्भर प्रसाद निषाद का अपने जातियों मे बेहतर वर्चस्व होने की वजह से उन्हें इस सीट पर फतह दिलाये जाने की सूत्रों के मुताबिक जिम्मेदारी सौंपी गयी है। इसके साथ-साथ लगातार चार बार विधायक होने के अलावा बहुजन समाजपार्टी की सरकार मे मंत्री के खिताब से नवाजे गये अयोध्या प्रसाद पाल पांचवी बार चुनावी सीट के लिए अपनी पूरी ताकत ही नहीं बल्कि हर दांवपेंच से निपटने को पूरी तरह से तैयार हैं।
जिले की छह विधानसभा सीटों मे अगर चुनावी मुकाबले की बात की जाये तो सबसे दिलचस्प चुनाव अयाह शाह विधानसभा को देखा जा रहा है इस सीट पर लगातार चार बार से बहुजन समाजपार्टी से अयोध्या प्रसाद पाल विधायक हो रहे हैं हाल ही मे बहुजन समाजपार्टी से रिस्ते बिगड़ने के बाद समाजवादी पार्टी का दामन थामने के बाद पांचवी बार चुनावी मैदान पर है। इसी सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने अपना खाता खोलने के लिए कभी सदर विधानसभा सीट पर दो बार विधायक रहने के साथ-साथ पूर्व माध्यमिक शिक्षामंत्री एवं कानून मंत्री जैसे ओहदे पद पर रहने वाले राधेश्याम गुप्त के पुत्र विकास गुप्ता पर चुनावी दांव खेला है। बहुजन समाजपार्टी भी अपनी सीट को बरकरार रखने के लिए पहले खेले गये तास के पत्ते मे भोला प्रसाद पाल को चुनावी मैदान मे अपना प्रत्याशी बनाया था लेकिन चुनावी समीकरण और जातीय समीकरण के आंकलन को करते हुए इस सीट पर क्षत्रिय समाज से तालुक रखने वाले तेज बहादुर सिंह को अपना प्रत्याशी बना दिया और बसपा का दामन थामकर विधानसभा की राह देखने वाले भोले पाल को बसपा से बाहर कर दिया गया। समाजवादी व कांग्रेस के गठबन्धन पर चल रहे चुनाव मे इस सीट पर वर्तमान विधायक अयोध्या प्रसाद पाल कहीं पांचवी बार भी जीत हासिल न कर ले इसके लिए उनके राहों पर राजनैतिक कांटों को बिछाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने केवट विरादरी के साथ-साथ अन्य विरादरियों के वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए केन्द्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति को जिम्मेदारी सौंपी गयी है इस सीट पर केवट विरादरी का वोट प्रत्याशी के लिए निर्णायक होता है। केन्द्रीय मंत्री श्रीमती ज्योति इसी विरादरी से तालुक रखती हैं लोकसभा के चुनाव पर मोदी लहर ने चुनावी जीत हासिल करने वाली श्रीमती ज्योति को कहीं न कहीं उनका विरादरी अब नेत मानने लगा है अपने विरादरी पर कितना जादू बिखेर सकेगी यह तो आने वाला वक्त बतायेगा लेकिन सबसे खास बात यह है कि इस सीट पर और परिशीमन के बदलाव के बाद केवट विरादरी के वोट पर अच्छी पैठ रखने वाले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विशम्भर प्रसाद निषाद को भी यह समाज एक बड़ा नेता मानता है। अब चुनावी मैदान मे यह देखना होगा कि जहां एक ओर भारतीय जनता पार्टी की केन्द्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति अपने चुनावी ध्रुवीकरण मे किस तरह का परिवर्तन लाते हुए अयाह शाह सीट पर बीजेपी को फतह मिलती है या नहीं वहीं सपा के राष्ट्रीय महासचिव श्री निषाद का इस सीट पर कितना वर्चस्व बचा है और इस सीट से चुनाव लड़ रहे वर्तमान विधायक व पूर्व मंत्री की साख को बचा पाने कितना सफल होते हैं लेकिन मतदाताओं की नजर चैतरफा दौड़ रही है। मतदाता अभी असली निर्णायक पायदान पर नहीं पहुंच पा रहा है इस विधानसभा सीट पर जब मतदाताओं से बातचीत की गयी तो उन्होंने कहा कि जिले के अन्य विधानसभा सीटों के अपेक्षा इस सीट पर दिग्गज नेताओं की जीत की होड़ है एक के बाद एक प्रत्याशी नेता का दरवाजे पर दस्तख हो रहा है। गांव की गलियारों पर अभी फिलाल त्रिकोणीय संघर्ष नजर आ रहा है। आगामी भविष्य क्या होगा इसके लिए मतदाता खामोश है मतदान के बाद गिनती के वक्त दूध का दूध पानी का पानी होगा।

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