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Tuesday, 28 February 2017

बोर्ड परीक्षा से पहले नकल माफियाओं ने शुरू किया वसूली

फतेहपुर, शमशाद खान । होली बाद शुरू होने वाली यूपी बोर्ड की परीक्षा को लेकर क्षेत्र में सक्रिय नकल माफिया दौरान परीक्षा केन्द्रों में व्यवस्था सुविधा के हिसाब से न केवल शुल्क ने का निर्धारण कर दिया है। वरन अपने खासों के जरिये उसकी वसूली भी शुरू कर दिये है। ताकि दोनों को किसी भी तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े। सूत्रों के अनुसार होली के बाद से होने वाली यूपी बोर्ड की हाई स्कूल, इण्टरमीडिएट परीक्षाओं सकुशल नकल विहीन सम्पन्न कराने के लिये शिक्षा विभाग द्वारा क्षेत्र में स्थित विद्यालयों में से कुछ चुनिंदा विद्यालयों को परीक्षा केन्द्रा का दर्जा दिया गया है। इनमें से कई विद्यालय दूर दराज क्षेत्रों में स्थित है। जहां पर न तो कोई सुविधा है न ही परीक्षार्थियों के आने जाने के लिये साधनों के आवा गमन की कोई व्यवस्था है। इन केन्द्रो में परीक्षा देने वाले बच्चों को अपने निजी साधनों का प्रयोग करना पड़ सकता है। चूंकि इनके अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है इन के पासा। सूत्र के मुताबिक ऐसे केन्द्रों की निगरानी भी पूरी तरह से नही हो पाती है। जिसके कारण इन क्षेत्रों में नकल के ठेकेदार पूरी तरह से अपने मकशद में सफल रहते है। बताया गया है कि सक्रिय नकल के ठेकेदारों द्वारा परीक्षा केन्द्रों पर बैठनें वाले बच्चों को व्यवस्था व सुविधा मुहैया कराने के नाम पर अलग-अलग तरह से शुल्कों का निर्धारण किया गया है। जो छात्र जिस प्रकार की सुविधा लेना चाहता है उसे तय किये गये शुल्क की अदायगी परीक्षा शुरू होने से पूर्व सम्बन्धित को देना पड़ेगा। ताकि दौरान परीक्षा दोनों को किसी भी तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े। ऐसा इस लिये किया जाता है। कि बाद में कोई गड़बड़ न हो सके। चूकिं वसूल की गयी राशि का एक बड़ा हिस्सा ऐसे लोगों के बीच वितरण करने के लिये अलग कर लिया जाता है। जिनसे-नकल के ठेकेदारों को व्यवधान पैदल कर देने की तनिक सी भी अंशका रहती है। यही कारण होता है कि नकल माफिया बिना किसी रूकावट के व डर, भय के बीच अपने मकशद पर पूरी तरह से सफल होते है। सूत्र के मुताबिक सक्रिय रहने वाले नकल माफियाओं के द्वारा अपने खासो के जारिये सुविधा का लाभ लेने वाले छात्र-छात्राओं के परिजनों से वसूली का कार्य भी शुरू करा दिया गया है। खास बात तो यह है कि इनको पहले ही पता चल जाता है कि किस विद्यालय का सेन्टर कहा गया है और किस-किस गांव क्षेत्र के बच्चे होते है। उसी के अनुसार यह अपनी प्रक्रिया चालू करते है। क्षेत्र में हर बार सक्रिय रहने वाले एक नकल के ठकेदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पूर्व में तो दिक्कते उठानी पड़ी है। लेकिन इस बार उनको कोई डर नहीं है। क्योकि जब परीक्षा का दौर होगा तो सरकारी मशीनरी सत्ता किसकी होगी को लेकर व्यस्त रहेगी। 

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