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Sunday, 12 February 2017

वेतन सरकार का कमीशन दुकानदार का फिर भी नही भरता पेट डाक्टरों का

फतेहपुर, शमशाद खान । जनपद मे वैसे तो शायद ही कोई सरकारी विभाग भ्रष्टाचार से अछूता हो नहीं तो हर विभाग मे भ्रष्टाचार की तूती बोल रही है। जिला अस्पताल के डाक्टरों पर शासन ने प्राइवेट मरीजों का उपचार करने पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगा रखा है किन्तु शासन के निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए जिला अस्पताल के पांच डाक्टरों स्वास्थ्य माफियाओं की एक टीम गठित कर रखी है। जिला अस्पताल के सामने मार्डन पैथोलाजी के नाम से सजायी गयी लूटने की दुकान मे सभी डाक्टर सरकारी हैं। बताया जाता है जिला अस्पताल मे तैनात रह चुके चर्मरोग एवं सामान्य रोग विशेषज्ञ  का इस जनपद से गैर जनपद स्थानान्तरण हो चुका है किन्तु उनका इस जनपद से मोह नहीं भंग हुआ है। वह हर रविवार को आते हैं तथा एक सौ पचास रूपये प्रत्येक मरीज से लेकर उसका उपचार करते हैं। इतना ही नही मरीज को जो दवा लिते है वह अपने एक चहेते मेडिकल स्टोर से ही मंगवाते हैं जिसमे उनका भारी भरकम कमीशन बंधा रहता है। इतना ही नही एक  डा0  एमबीबीएस के0जे0एम0सी0 (लखनऊ) के विशेषज्ञ टीबी एवं छाती रोग एवं  नाम, कान, गला सर्जन व भूतपूर्व रेजिडेन्ट हैलट अस्पताल कानुपर प्रत्येक मंगलवार को सुबह ग्यारह बजे शांम चार बजे तक पैथोलाजी मे बैठ कर मरीजांे का उपचार करते हैं।  एमबीबीएस एमडी विशेषज्ञ मानसिक एवं सेक्स रोग के अलावा आधा दर्जन डाक्टरों की टीम है। पैथोलाजी मे बैठने वाले डाक्टरों ने अपने-अपने दिन निर्धारित कर रखे हैं तथा मरीजों से मंहगी फीस लेकर मालामाल होने मे जुटे हुए हैं। जिला अस्पताल मे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा अक्सर  निरीक्षण  किया जाता है किन्तु शायद उनकी नजर इस लूट की दुकान पर नही पड़ती है। डाक्टर को भगवान समझने वाले मरीज को क्या मालूम कि जिसको वह भगवान समझ रहे हैं दरअसल वह मरीजों के पैसे से ही पकवान खा रहे हैं। इन डाक्टरों को इस बात से कोई परहेज नही है कि वह सरकारी डाक्टर हैं और वेतन सरकार से लेते हैं। वेतन भले ही वह सरकार से लेते हैं किन्तु कमीशन दुकानदार का खाते हैं। यदि इस पैथालाजी की शासन द्वारा पूरी ईमानदारी से जांच करायी जाए तो गरीब अमीर मरीज लुटने से बच सकता है। 

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