फतेहपुर, शमशाद खान । कोटेदारों की मनमानी के चलते राशन के मिट्टी के तेल की जमकर ब्लैक मार्केटिंग होने की वजह से नगर में अधिकांश चार व तिपहिया वाहन बेखौफ होकर मिट्टी के तेल से चलाये जा रहे है। नतीजतन मिट्टी के तेल से चलने वाले वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुंआ एक ओर जहां पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है। वहीं दूसरी ओर लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। जबकि इसकी रोकथाम के लिए जिम्मेदार विभाग मौन साधे हुए हैं।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों से डीजल और पेट्रोल के दामों के हुई वृद्धि से लोगों के होश उड़ गये हैं और उनके डीजल से चलने वाले व्यवसायिक वाहन घाटे का सौदा साबित हो रहे। ऐसे में उन्होने मिट्टी के तेल को डीजल और पेट्रोल के विकल्प के तौर पर चुन लिया है। कोटेदारों सीधी सेटिंग बिठाकर आम लोगों तक पहुंचने वाला मिट्टी का तेल वाहन स्वामियों तक पहुंचने लगा है। सूत्र बताते हैं कि अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में कोटेदार भी धडल्ले से लोगों का हक दूसरों को बेंच रहे है। 35 से 45 रूपये प्रति लीटर के हिसाब से मिट्टी का तेल ब्लैक मार्केटिंग में बेंचा जा रहा है। जिससे बस, ट्रक, टैªक्टर, टैक्सियां, पिकअप, आपे जैसे व्यवसायिक वाहन चल रहे हैं। अकेले डीजल से चलने वाले वाहनों में ही नही मिट्टी के तेल का प्रयोग हो रहा बल्कि पेट्रोल से चलने वाली टैक्सियां भी मिट्टी के तेल से चल रही हैं। मात्र स्टार्टिंग के समय कारवेटर को पेट्रोल सुंघाया जाता है। टैक्सी चालकों का कहना है कि डीजल टैंक के पास ही टैक्सियों में पेट्रोल का छोटा टैंग लगा दिया जाता है जो सिर्फ स्टार्टिंग के समय पेट्रोल कारबोरेटर तक पहुंचाता है। यही नही कई दो पहिया वाहन भी घासलेट से दौड रहे हैं। शहर की सड़कों पर दिन भर सरपट भागने वाले वाहनों में जलने वाला मिट्टी के तेल का धुंआ काफी जहरीला होता है। जिसकी वजह से शहर में भारी प्रदूषट फैल रहा है। आलम यह है कि रेलवे स्टेशन, कचहरी रोड, बस स्टैण्ड रोड पर इन ही वाहनों द्वारा छोड़े गये जहरीले धुयें की दुर्गंध से लोग परेशान रहते हैं। अगर किसी टैक्सी के पीछे खडे हो जाओ तो लगता है कि मानो दम घुट जायेगा। ऐसा जहरीला धुंआ जब सांस के जरिये शरीर के अन्दर पहुंचता है तो बेचैनी होने लगती है। वहीं आंखे जलने लगी है। इस संबंध में चिकित्सकों का कहना है कि वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुंआ स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। धुंये की वजह से आंखों में जलन, सूजन के अलावा कई तरह की संक्रमित बीमारियां हो सकती हैं। यह जहरीला धुंआ फेफड़ों पर सीधा हमला बोलता है। जिसकी वजह से फेफड़ों में संक्रमण और टीवी जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं। बच्चों में जहरीले धुंये का प्रभाव सबसे अधिक और जल्दी होता है। इस लिए वाहनों में मिट्टी के तेल का प्रयोग पर शक्ति से रोक लगायी जानी चाहिये। इधर डीजल की वजह से मिट्टी के तेल से वाहन चलाने वाले लोगों का कहना है कि डीजल और पेट्रोल के दाम जिस गति से बढ़े हैं। उससे वाहन चलाना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। वह मानते हैं कि डीजल और पेट्रोल की बजाये मिट्टी के तेल से वाहन चलाने से वाहनों के उपकरण जल्दी खराब हो जाते हैं। लेकिन उनकी मरम्मत डीजल और पेट्रोल वाहन चलाने से सस्ती होती है। अतः वाहनों की मशीनरी की परवाह किये बिना नगर ही नही समूचे जिले में मिट्टी के तेल से वाहन चलाये जा रहे हैं।

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