फतेहपुर, शमशाद खान । जनपद के बिन्दकी तहसील क्षेत्र के विकासखंड खजुहा के अंतर्गत आने वाली ग्राम सभाओं में संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को मिलने वाला पोषाहार जानवर खा रहे है शिकायत के बाद विभाग के अधिकारी आंगनवाड़ी केंद्र में पहुंचकर वसूली करने के बाद वापस चले आते है जिससे पोषाहार की बिक्री करने वाली आंगनवा़ड़ी कार्यत्रियों के हौसले बुलंद है। विकासखंड खजुहा के अंतर्गत आने वाली ग्राम सभाओं में संचालित आंगनवाड़ी केंद्रो में इस तरह धंाधली की जा रही हैं बच्चों को मिलने वाला पोषाहार आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा पशुपालकों को बेच दिया जाता है जिससे केंद्र में आने वाले बच्चे बिना पंजीरी लिए ही घर वापस जाना पड़ रहा हैं इन केंद्रों का यह हाल है कि जिस केंन्द्र में बच्चे भी नही है वह सब कागज में बच्चों की संख्या ज्यादा दिखाकर उनकी हाजरी बनाई जाती है जबकि वास्तविकता यह है कि खजुवा विकासखड के अंतर्गत आने वाले इन केंद्र में बच्चे नही है परंतु रजिस्टरों मे ंयह बच्चों की संख्या 50 से लेकर 75 तक दर्ज की जाती है। और उसी के आधार पर विभाग से पोषाहार उठाया जाता है। यहां तक की क्षेत्र के कुछ ऐसे केंद्र है जो माह में केवल दो चार दिन ही खोले जाते है बाकी समय बंद रहते है इसकी सूचना जब ग्रामीणों द्वारा विभाग के सीडीपीओ सुपरवाइजरों को दी जाती है तो वह लोग शिकायतकर्ता का नाम आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों से बता करके कार्यवाही करने के नाम पर उनसे अवैध वसूली कर वापस चली जाती है विकास खंड के अंतर्गत आने वाले केंद्र गंगोली डांडा, अमोली जाफर गंज मदुरी ककोरा गढ़ी लालपुर भारतपुर बहादुरपु सहित यमुना तटवर्ती क्षेत्र में संचालित आंगनवाड़ी केंद्रो का यह हाल है कि जिन केंद्रों में कार्यकत्रियों द्वारा 50 से अधिक बच्चों की उपस्थिति रजिस्टर बनाकर विभाग से जिस तरह से पोषाहार उठाया जाता है वह जमीनी हकीकत जानने के लिए इन केंद्रों में केवल 5 बच्चों से लेकर 10 बच्चों तक की संख्या देखने को मिलती है जबकि इन कार्यकत्रियों द्वारा फर्जी बच्चों की संख्या दिखाकर विभाग से पोषाहार उठाकर बाजारों में बेचने का सिलसिला लंबे समय से चल रहा है विभाग के अधिकारी सिर्फ इन कार्यकत्रियों से वसूली में ही लगे रहते है इस संबंध में जब आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों से जानकारी ली गई तो उन्होने बताया कि 1000रूपए प्रत्येक माह सीडीपीओ तथा 500 रूपए सुपरवाइजर को देना पड़ता है इसीलिए आंगनवाडी कार्यकत्रियों की मजबूरी है की पोषाहार को बाजारों में बेचना पड़ता है हौसला पोषण योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को बनाकर अच्छा भोजन खिलाने की योजना पूरी तरह से कागजों पर चलाई गई है जबकि 3 माह तक लगातार इस योजना का पैसा आंगनवाड़ी और प्रधान द्वारा संचालित खाते में भेजा गया था जिसको प्रधान और आंगनवाड़ी ने मिलकर पैसा तो निकाल लिया परंतु महिलाओं को मिलने वाली सेवाएं पूरी तरह से छलिया साबित हो रही है किसी भी केंद्र में आज तक गर्भवती महिलाओं को किसी भी केंद्र में भोजन बनाकर नहीं गया परंतु कागजों में सभी केंद्रो में गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली सेवाएं पूरी दर्शाई जा चुकी है नाम ना छापने की शर्त पर आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों ने बताया कि हौसला पोषण योजना के तहत आने वाले पैसे को ग्राम प्रधान ने आधार ले लिया है इसलिए हम लोगों ने इस योजना को पूरी तरह से क्रियान्वन नहीं कर पाई है ग्राम पंचायतों के मुखिया द्वारा प्रमाण पत्र जारी कर यह साबित कर दिया योजना का लाभ गर्भवती महिला तक पहुंचाया गया हैं परंतु यह लाभ केवल कागजों तक ही सीमित रहा है।
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