फतेहपुर, शमशाद खान । विधानसभा चुनाव में शत प्रतिशत मतदान कराए जाने को लेकर निर्वाचन आयोग ने जिला प्रशासन को मतदाता जागरूकता अभियान को मतदाता जागरूकता अभियान के जरिए मतदाताओं केा मतदान के प्रति जागरूक करने के भले ही निर्देश जारी किए हो लेकिन प्रशासनिक अधिकारी के ढुलमुल रवैये से पूरे जिलें में प्रशासनिक स्तर पर चलाया जा रहा मतदाता जागरूकता अभियान फ्लाफ होता दिखाई दे रहा है। इसके अलावा जिले की विधानसभाओं से ग्रामीणों की वोट बहिष्कार की दी जा रही चेंतावनी से यह अभियान पूरा सफल होता नहीं दिखाई पड़ता है। बताते चले कि विधानसभा चुनाव में जिले से शत् प्रतिशत मतदान कराए जाने को लेकर निर्वाचन आयोग ने जिला प्रशासन को सभी विधानसभाओं में मतदाता जागरूकता अभियान चलाकर मतदाताओं केा मत के महत्व को बताकर मतदान के प्रति जागरूक करने के सख्त निर्देश दिए है। इतना ही नही नुक्कड़ नाटकों के माध्यमों के साथ अन्य माध्यमों के जरिए मतदाताओं को जागरूक करने के फरमान है। ऐसा नही है। कि निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार प्रशासनिक स्तर पर मतदाता जागरूकता अभियान न चलाया जा रहा हो लेकिन प्रशासनिक स्तर पर चलाया जा रहा मतदाता जागरूकता अभियान मतदाताओं के लिऐ नाकाफी साबित हो रहा है। मतदाता जागरूकता अभियान के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी/डीएम ने सभी तहसीलों के उपजिलाधिकारियों सहित अन्य मुहकमें के अधिकारियों को निर्देश जारी किए है। आलम यह है कि निर्वाचन के आयोग के मंशा के अनुरूप मतदाता जागरूकता अभियान तो चलाया जा रहा है। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों के ढुलमुल रवैये व गंभीर रूख अख्तियार न करने से पूरे जनपद में प्रशासनिक स्तर से चलाया जा रहा मतदाता जागरूकता अभियान फ्लाफ साबित हो रहा है। आलम यह है कि जिम्मेदार अधिकारी मतदाता जागरूकता अभियान के तहत् आयोजित होने वाले कार्यक्रम की शुरू आत तो करा देते है। लेकिन इसके बाद उनका नदारत हो जाना इनके ढुलमुल रवैये केा प्रमाणित करना है। ऐसे हालातों में निर्वाचन आयोग के शत प्रतिशत मतदान की मंशा पूरी होती नही दिखाई पड़ रही। खास बात यह भी है कि जिले की विधानसभाओं में वोट बहिष्कार की आवाजें भी उठने लगी है। ऐसी स्थित में प्रशासनिक स्तर पर चलाया जा रहा मतदाता जागरूकता अभियान कैसे पूरा हो सकेगा।
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