फतेहपुर, शमशाद खान । जनपद में तेइस फरवरी को सम्पन्न हुुये चैथे चरण के चुनाव में सभी प्रत्याशी अपनी-अपनी जीत का दावा करते नही थक रहे है। अयाह शाह विधान सभा मे केन्द्रीय मंत्री और सपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्य सभा सदस्य की प्रतिष्ठा भी दाव पर लगी है। इस विधानसभा से चार बार से बसपा से विधायक बनते चले आ रहे अयोध्या प्रसाद पाल इस बाद समाजवादी पार्टी से चुनाव लडे है और यदि वह जीत हासिल करते है तो वह इस विधानसभा से अपना ही रिकार्ड तोडेगे। हालाकिं इस विधानसभा में त्रिकोणीय मुकाबले के सकेत मिल रहे है। इस विधानसभा में सपा प्रत्याशी को छोड कर भाजपा से पूर्व मत्री राधेश्याम गुप्ता के पुत्र विकास गुप्ता और बसपा से तेज बहादुर सिहं नये चेहरे है इस विधानसभा निषाद मतदाता हमेशा से निर्णायक की भूमिका निभाता चला आ रहा है निषाद समाज जिसका सहयोग कर देता है उसी प्रत्याशी को जीत का ताज हाशिल होता है।
जनपद की अयाहशाह विधानसभा सीट पर बसपा से लगातार चार बार से विधायक बनते चले आ रहे अयोध्या प्रसाद पाल को बसपा प्रमुख सुश्री मायावती ने टिकट नही दिया था जिससे नाराज होकर वह सपा का दामन थाम कर पांचवी बार विधानसभा पहुचने के लिये चुनावी बिगुल फूका था। यदि वह चुनाव जीतते है तो वह अपना ही रिकार्ड तोडेगे। इस विधानसभा में पिछले काफी समय से कमल नही खिला वर्तमान की अयाह शाह और पूर्व की हसवा विधानसभा से भाजपा से आरपीएन सिंह विधायक चुने गये थे। उसके बाद इस विधानसभा में कमल नही खिला। यदि इस बार भाजपा के प्रत्याशी विकास गुप्ता चुनाव जीतते है तो दूसरी बार इस विधानसभा में कमल खिलेगा। इस विधानसभा में पिछले बीस वर्ष से बसपा का दबदबा कायम होता चला आया है और यदि बसपा के प्रत्याशी तेजबहादुर सिंह चुनाव जीतते है तो बसपा का दबदबा बराबर कायम रहेगा। हालाकि इस विधानसभा में सभी प्रत्याशियो की नजरे निषाद विरादरी पर टिकी हुयी थी क्योकि इस समाज का ही जीत के लिये निर्णायक आधार माना जाता है। निषाद समाज से ताल्लुक रखने वाली केन्द्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने अपने प्रत्याशी विकास गुप्ता को जीत का ताज पहनाने के लिये सजातीय मतदाताओ से व्यापक जनसम्पर्क कर वोट मागे थें। वही सपा के राष्ट्रीय महासचिव और राज्य सभा सदस्य विश्वम्भर प्रसाद निषाद ने सपा प्रत्याशी अयोध्या प्रसाद पाल के पक्ष मे यमुना के पास के कई गांवो में जनसभाये कर वोट देकर सपा प्रत्याशी केा जिताने की अपील की थी। जीत हार का फैसला तो ग्यारह मार्च की तारीख ही तय करेगी। किन्तु अपने-अपने प्रत्याशियो को जिताने के लिये केन्द्रीय मंत्री और राज्यसभा सदस्य की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुयी है। हालाकि इस विधानसभा में भी राजनैतिक गणितज्ञो की गणित काम नही कर रही है क्योकि तीनो प्रत्याशियो के बीच काटे की टक्कर के संकेत मिल रहे है सभी प्रत्याशी अपनी-अपनी जीत के कर रहे है दावे।

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