चित्रकूट, ललित त्रिपाठी । भभूत लपेटकर ईश्वर की साधना में रत साधु-संत व घंटे-घड़ियालों की पवित्र धुनों के बीच धूनी की सोंधी-सोधी सुगंध ऐसा लगता है कि चित्रकूट में अब यह बीते दिनों की बात हो गई है।
जिस अंदाज में चित्रकूट का चित्र और चरित्र बदल रहा है उससे यह धरमनगरी अपराधियों के एक बडें अडडे के रूप में नजर आने लगी है। धूनी की सांेधी सुगंध में स्मैक की दुर्गध घुलती जा रही है। जिसके नशे के मकड़जाल में फंसकर यहां कई घर तबाह हो चुके है। मादक पदार्थो के धंधे में पुलिस व आबकारी की संदिग्ध भूमिका ने जिस्म खोखला करने वाले नशे के कारोबारियों का हौसला इस कदर बढ़ा दिया है कि उन्होंने थानों के इर्द-गिर्द ही अपनी दुकानें सजा ली है। जिस नशे से चित्रकूट का युवा तिल-तिल कर मर रहा है उसे पुलिस व आबकारी विभाग का संरक्षण मिला हुआ है तभी तो यहां खुलेआम यह जहर बेचा और खरीदा जा रहा है। यह विडंबना ही है कि जिस पुलिस पर मादक पदार्थो पर अंकुश लगाने का जिम्मा है उसी का अघोषित संरक्षण नशा कारोबारियों को मिला हुआ है यदि ऐसा न होता तो थाने से सटी स्मैक गांजे की दुकानें नही होती बताया जाता है कि खटिकान मोहल्ला जहां थाना है वहां से सटी कई दुकानों में प्रतिबंध के बाद भी न केवल शराब बिकती है बल्कि स्मैक की पुड़िया भी सहज उपलब्ध कराई जाती है इसके अलावा भरत घाट नयागांव खटिकान मोहल्ला तुलसी चबूतरा बाबा घाट लोखरिहा फारेस्ट आफिस के सामने पीली कोठी मोड सियाराम कुटीर रामधाम प्रमोद वन गोदावरी मोड पथरा पालदेव चमरौड़ी बस्ती स्मैक-गंाज व शराब बिक्री के बडे़ केंद्र है। आश्चर्य है कि पुलिस व आबकारी विभाग के कर्मचारियों को इसकी भनक नही है। पाक धरमनगरी में नशे का नेटवर्क फैलाकर यहां की पवित्र धरती को नापाक करने वाले आखिर कौन है। भले ही पुलिस इस मामले में मासूमियत से अनभिज्ञता जताए मगर जनचर्चा में यहां कई नाम है स्मैक के थोक कारोबारी के रूप में जहां कर्वी के एक डाॅक्टर का नाम सामने आया वही भरत घाट के मोहन व बल्लू पंडा नरेश लाला पटेल बडकू उमेश समेत कई नाम है जो मादक पदार्थो के कारोबार में लिप्त है। पुलिस भी इनके बारे में सब जानती है मगर सिक्कों की खनक ने इस मसले से मुंह फेरने के लिऐ पुलिस को मजबूर कर रखा है। जिन लोगो पर मादक पदार्थो पर अंकुश लगाने का जिम्मा है वे कुंभकरणी नींद सो रहे है। स्मैक से मौत के मामले सामने आने के बाद कलेक्टर ने कहा था कि शीघ्र ही पुलिस व आबकारी विभाग के साथ मिलकर एक्शन प्लान बनाया जाएगा मगर अब तक ऐसी कोई पहल नही हुई दुर्भाग्य की बात है कि समाज को दिशा देने वाले वे साधु-संत भी चुप है जो चित्रकूट की अस्मिता व पवित्रता की लड़ाई लड़ने का दावा करते रहते है। इसी प्रकार बीडी-सिगरेट सेवन को नशेड़ी फायर करना कहते है। स्मैक एक महंगा सौदा है मगर सेवन करने वाले इसे महंगा कार्ड बताते है क्योकि इस नशे का आदी दो ग्राम का सेवन प्रतिदिन करता है। ऐसा नशेड़ी नशे में झूमता हुआ दूसरे नशेड़ी से कहता है कि बड़ा महंगा कार्ड हो गया है और तीन हजार रूपये खर्च करके मोबाइल रिजार्ज करवाया है कई बार महंगा नशा खरीदने की स्थिति में नशेडी अपनी असमर्थता प्रकट कर सकता है कि टाॅवर तो कंपनियों ने बहुत लगा दिए है पर कनेक्शन महंगा है उल्लेखनीय है कि स्मैक पान के पतें में रख रक देते हुए इसे एमपी पता कहा जाता है। इसी प्रकार नशीली दवाईयां बेचने वालों ने भी कोड वर्ड रखे हुए है।
शहर में भी सक्रिय- स्मैक का नशा चित्रकूट से यूपी की सीमा पर स्थित चित्रकूट व सतना जिला आज कल नशेड़ियों के लिए स्वर्ग बना हुआ है। नशा माफिया अब नेटवर्क को बढावा देने के लिए हाईटेक टेक्नोलाॅजी का इस्तेमाल करने लगे है। नशा माफिया के गिरोह में महिलाएं तथा स्कूली बच्चे भी भागीदारी निभा रहें है आधुनिक संचार साधनों (मोबाइल) के जरिए धंधां करने वाले नशे के कारोबारी गुप्त कोडवर्ड तैयार कर काम कर रहे है जबकि पुलिस व आबकारी महकमा अनजान बना हुआ है गांजे का सेवन करने वाला नशेडी दूसरे नशेडी से पूछता है कि मोबाइल रिचार्ज करवाना था कहां से होगा जिस पर दूसरा नशेड़ी इस तरह जवाब देता है कि अमुक चैपाल पर आज सिम कार्ड बांटे जाएंगे यानि उक्त चैपाल पर नशा मिलेगा। इसी प्रकार एक नशेड़ी को यदि लगे कि दूसरे नशेड़ी का नशा टूट गया है तो वह उससे कहेगा कि लगता है तेरा मोबाइल रेंज नही पकड़ रहा तो इस पर उसका उतर होगा कि आज सिर्फ मिस काॅल ही दी जा सकती है यानि नशा कम किया हुआ है। नशा न मिलने पर मोबाइल डेड कहा जाता है। नशा बेचने वाला यदि पुलिस भय से अपना स्थान बदल ले तो वह नशेड़ियों को सूचना इस प्रकार देगा कि टाॅवर अब अमुक स्थान पर लगेगा और कल से काम शुरू हो जाएगा। कोई नशेड़ी शराब अफीम छोड़कर नशे की गोलियां खाना शुरू कर देता है वह मोबाइल का पहले कनेक्शन कटवा देने तथा दो सिम वाला नया मोबाइल लेने की बात कहता है।

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