कानपुर - दिब्यांग जनों के प्रति संवेदन शीलता कानपुर के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा की पहचान बनती जा रही है, इनके मामले मे जितनी संवेदना और लगन के साथ कौशल राज शर्मा पूर्ण करते है ।वह केवल कानपुर नगर ही नही पूरे उ प्र मे चर्चा का विषय है तथा कानपुर नगर के दिब्यांग जन,यहा की संस्थाओ और आम नागरिक जिलाधिकारी के इस कार्य व्यवहार कि अत्यन्त कायल है।
चाहे 2017 के बिधान सभा चुनाव मे दिब्यांग मतदाताओ को बूथ तक लाने ,वोट डलाने कि व्यवस्था का मामला हो या पूर्व मे दिब्यांगजन के करेक्टिव सर्जरी का मामला ,कानपुर दोनो मामले मे प्रदेश मे सबसे आगे रहा और समाज के सामने एक मिसाल कायम किया ।
नम्बर माह मे उर्सला हास्पिटल मे एेसे दिब्यांग जनो की जिनका पैर पोलियों और अन्य कारणो से टेढ -मेढा हो गया था सर्जरी हुई थी,इस सर्जरी के लिए 0 से 23 बर्ष तक के दिब्यांग पात्र थे ,इन दिब्यांगो का आपरेशन उर्सला हास्पिटल मे दिल्ली के डाक्टरो कि टीम द्वारा किया गया था
जिलाधिकारी महोदय द्वारा अभियान चलाकर पूरे जिले मे 1000 दिब्यांगो का चिन्हीकरण कराया गया इससे आगनबाडी़ ANM,आशा ,सर्वशिक्षा अभियान के टीचर,समस्त NGOका सहयोग लिया गया,दिब्यांगो के चिन्हीकरण के बाद ब्लाकवार और ग्राम वार कर्मचारीयो की ड्यूटी लगाई गयी ।दिब्यांग जनो को लाने के लिए,ARTO और इजीनियरिंग कालेज के सहयोग से 20बसो कि बेवस्था की गयी,सभी दिब्यांग जनों को उर्सला तक लाया गया ,उनका परीक्षण किया गया परीक्षण मे जो पात्र मिले अनके अलावा सभी को फिर उनके घर वापस छोड़ा गया ।
1000 दिब्यांग जनों मे लगभग 200 दिब्यांग जन पात्र पाए गए जिनमे दिल्ली की टीम 2दिनो मे 142 लोगो का आपरेशन कर पायी,उन्हे बिश्वास हि नही हो रहा था कि इतने बड़े पैमाने पर कैसे दूर-दराज क्षेत्रो से दिब्यांग लाएे गये है,शेष दिब्यांगो का आपरेशन इटावा मे होने वाली तिथि मे भेजकर कराया गया ।
सभी मरीजो को तथा उनके एक सहयोगी को तीन दिन तक चाय नास्ता और खाने कि व्यवस्था तथा सहयोगियो के लिए चारपाई रजाई ,कम्बल की व्यवस्था जिलाधिकारी महोदय की तरफ से की गयी थी,खास बात यह थी कि विभाग के पास इस मद मे कोई धनराशि नही थी सारी व्यवस्था जिलाधिकारी महोदय द्वारा अपने स्तर से की गयी थी ।
आपरेशन के बाद सारे मरीजो को मुख्य विकास अधिकारी महोदय द्वारा एम्बुलेंस से उनके घर तक छोड़ा गया था,उस कार्यक्रम मे जनपद कानपुर नगर पूरे उत्तर प्रदेश मे नम्बर 1 रहा था और आज भी अभी अन्य जिलों मे आपरेशन हो रहे है ।किसी जगह जनपद कानपुर के आधे यानि 70 लोगो के आपरेशन नही हो पाये है।इलाहाबाद,मेरठ,बनारस जैसे बड़े जिलो कि संख्या 50 के निचे है।
इसी प्रकार एक संस्था के मूक बधिर बच्चो को जम्मू कश्मीर में डांस प्रतियोगिता मे भाग लेना था,लेकिन संस्था के पास आर्थिक कठिनाईयां थी। जिलाधिकारी महोदय द्वारा उन बच्चो को आने जाने कि व्यवस्था की गयी और उन बच्चो को आल इडिंया मूक बधिर डांस प्रतियोगिता मे प्रथम स्थान प्राप्त हुआ।
इसी प्रकार 19फरवरी 2017के मतदान मे दिब्यांग जनों के चिन्हीकरण की कठिन प्रक्रिया के बाद उन्हे बूथ तक लाने व ले जाने के लिए 1200 ई-रिक्शा लगभग 600 एम्बुलेंस तथा सहयोग के लिए प्रत्येक बूथ पर 2 और कुल लगभग 6500 स्वयंसेवको को लगाया गया जो दिब्यांग को घर से लाकर बिना कठिनाई के वोट डलवाते रहे।
जहा कानपुर के सामान्य लोगो मे 57% मतदान किया,वही दिब्यांग जनों का मतदान प्रतिशत 80 से उपर था।जो लगता है कि पूरे भारतीय इतिहास के निर्वाचन प्रक्रिया मे सबसे शानदार होगा । जिलाधिकारी की इस व्यवस्था से केवल दिब्यांग ही नही अधिक वृध्द व किसी कारणो से असमर्थ समान्य जनो को भी पर्याप्त सुबिधा मिली,जिससे कारण वे अत्यन्त प्रसन्न दिखे ,एक मतदान केन्द्र पर जिलाधिकारी महोदय स्वयं एक वृध्द माता जी को एम्बुलेंस से उतारने मे मदद करते हुये दिखाई दिये।
जिलाधिकारी के इस महान कार्य की पूरे जिले मे चर्चा है तथा दिब्यांग जन और इस क्षेत्र मे कार्य करने वाली संस्थाओं लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से उनके कार्य कि प्रशंसा कर रही है, आम नागरिक भी एेसी व्यवस्था देख कर अत्यन्त प्रसन्न है,और जिलाधिकारी के सुमहरे भविष्य के साथ असहाय व निर्बल लोगो की इसी तरह मदद करते रहे यह कामना कर रहा है।

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