फतेहपुर, शमशाद खान । आने वाली 11 तारीख तक हर दलीय समर्थक अपने-अपने प्रत्याशियों की जीत पक्की बताकर मतदाताओं समेत सरकारी कर्मचारियों तथा आम जनता के बीच शुरू रहने वाली जीत हार की चर्चाओं को धार देने में लगे हुए है। बतादें कि 23 फरवरी को मतदान का कार्य पूरा हो जाने के बाद हर कोई अपने को खाली-खाली महसूस कर रहा है। चाहे व दलीय नेता समर्थक एवं उनके पार्टी के कार्यकर्ता हो या फिर आम मतदाता समेत सरकारी कर्मचारी है। इनके बीच सन्नाटा पसर गया है। इसे हटाने के लिये तथा खाली दिमाग व समय को भरने के खातिर इनके द्वारा अब जीत हार को लेकर चर्चाओं का सिलसिला शुरूकर दिया गया है। इस प्रकार की होने वाली चहुं ओर चर्चाओं को धार देने का काम दलीय प्रत्याशियों के खास समर्थक कर रहे है। कोई भी समर्थक अपने उम्मीदवार को पराजित मानने के लिये तैयान नही है हर दल का सिपाही अपने दरोग रूपी उम्मीदवार की भारी मतो से जीत होली को लेकर चर्चाओं को अधिक से अधिक रफ्तार देने में लगा हुआ है। एक बार चर्चा छिड़ जाने के बाद इसमें सरोक रहने वालों को यह तक याद नही रहता है कि उन्होने खाना खाया है कि नही और जिस काम के लिये वह घरों से बाहर निकलकर आये है उसकों पूरा कर लिया है। कि नहीं। केवल चाय, पान और जीत हार की चर्चा में पूरा दिन समय गंवा देते हैं खास बात तो यह है कि जीत हार की जितनी चिंता मतदाता तथा दलों के समर्थकों कार्यकर्ताओं को सता रही हैं उससे कई गुना ज्यादा चिंता सरकारी दफ्तरों में विराजमान रहने वाले कर्मचारियों के बीच व्याप्त है। चूंकि इनका मानना है कि यदि उनके मुताबिक वाला सफल हो गया तो उनके रूकें कार्य एक झटके में पूरे हो सकते है। ऐसी उम्मीदें हर कोई अपने जेहन में पाल रखे है। इस दौरान इतना ध्यान जरूर रखते है कि वह खुल कर किसी के पक्ष में न तो आये नही धोखे से उनकी जुबान से कुछ निकल जायें। बस धमा-धमा होली स्थिति बनाये रख है। जो जीतेगा वह मेरा होगा। जैसे आम लोग किया करते है। तहसील खुलाने के बाद समीप पर मौजूदा चाय-पान की दुकानों में एक बार भीड़ के बीच चर्चाओं का दौर शुरू हुआ तो दोपहर तक बंद होने का नाम ही नही ले रहा था। मजबूरन दुकानदार को कहना पड़ा कि भइया हमे दुकान करने दो आप कही और चर्चा करों।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment