फतेहपुर, शमशाद खान । यमुना नदी के किनारे बसे ग्रामों मजरों में आने वाले महीनें से पीने के पानी का संकट पहाड़ बनकर खड़ा हो सकता है। चूंकि आबादी के हिसाब से क्षेत्र में धरती से पानी निकालने की कोई व्यवस्था नही है। जो है भी वह देख-देख के आभाव की वजह से धड़ाम है। किशनपुर खखरेरू, धाता थाना क्षेत्रों से गुजारी यमुना नदी के किनारे बसे ग्रामों मजरों में रहने वाले परिवार के समक्ष हर मौसम में पीने के पानी की समस्या बनी रहती है। चूंकि आबादी के हिसाब से इन इलाकों में हैण्ड पम्प नही लगे है। जो लगे भी है उनसे जरूरत नही पूरी होती है। कारण देख-रेख के आभाव के चलते अधिकार हैण्ड पम्प खराब पड़े रहते है। जिनके तरफ न तो प्रशासन का नही जल निगम विभाग के अधिकारी निगाह करते है। यमुना नदी के समीप बसे सभी परिवारों के सामने पानी को लेकर अफरा-तफरी का वातावरण बना रहता है। क्योकि क्षेत्र में एक भी कुंए नहीं बने है। केवल निजी नलकूपों व हैण्ड पम्पों का सहारा ग्रामीणों के सामने होता है। सरकारी नलकूप हो चाहे हैण्डपम्प सभी खराब पड़े रहते हैं यदि इन की तरफ नजर डाल दी जाए तो पानी की समस्या न पैदा हो सके। चूंकि छोटी-छोटी तकनीकी खराबी के कारण यह बेमकशद होते चले जाते है। जिनकी ओर कोई नहीं देखता है। यमुना किनारे के ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या विकराल रूप धारण कर सकती है। चूंकि इसके पहले भी अनेकों बार यहां के वशिंदे इस परेशानी से जूझ चुके है। यही हालत बने रहे तो इस बार मार्च के माह से क्षेत्रवासियों के समक्ष पानी के पानी का संकट पहाड़ बनकर खड़ा हो सकता है। रानीपुर, दामपुर, अहमदगंज तिहार, कुल्ली, नरैली, च्यांदापुर, नसीरपुर, डड़िया दसईपुर चातर डेरा आदि गांवों मजरों में हर बार पानी की किल्लत से लोगों को जुझते देखा जाता है।
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