फतेहपुर, शमशाद खान । किसी से दुश्मनी निकालनी हो तो उसे शराब पीने की लत लगा दी यह बात कई माने में सच साबित हुयी है। शराब एक ऐसा जानलेवा हथियार है। जिसकी नोक हमेशा पीने वाले के पेट की तरफ रहती है। सेहत पैसे और इज्जत की परवाह न करने वाले पियक्कड़ों की तादात तेजी से बढ़ रही है। इसकी एक वजह शराब पीने की खुली कानूनी छूट तो हर कही सहुलियत से मिल जाना भी पीने वालों को बढावा देने वाली बात है। राज्य सरकारें भी आबकारी नीति बनाते समय ज्यादा से ज्यादा कमाई के लालच में शराब बनाने और बेंचने वालों को सहूलियत और छूट देने लगी है। आम लोगों की बराबरी से उन्हे कोई वास्ता नही रहता है। इसमें कोई शक नही कि जिन्दगी की रफ्तार तेज और तनाव भरी होती जा रही है। मगर इस वक्त पर छूटकारा पाने की सोच रखने वाले भी तेजी से बर्बाद हो रहे हैं। शुरू में शराब शौकिया पीते हैं। लेकिन बाद में वही लत बन जाती है। यह समय ऐसा आता है जब पीने वाला कहीं का नही रह जाता है। समाज तो पीने वालों को बुरी नजर से देखता ही है घर वाले भी उससे हमदर्दी न रखते हुए तिरस्कार करने लगते हैं। चूंकि शराबी शराब के अलावा किसी का सगा नही होता है। इस लिए उसका कोई सगा नही रह जाता है। शराबी शराब पीते-पीते दिमाग किस कदर बेकाबू हो जाता है कि कभी-कभी अपनी बहन बेटी मां को बुरे अपशब्दों का प्रयोग करने से बाज नही आता है। कल की हर तीसरी वारदात में शराब या तो मारने वाला अधिक पी रखी थी। इसी तरह खुदकुशी करने से पहले भी कई लोग शराब पीने लगे हैं। इन हालातों में जिम्मेदार पीने वालों को ही ठहराया जायेगा। जो नशे की घातक नतीजों से वाकिफ है। जुर्म के अलावा जो नुकसान शराब से होते हैं। गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा शराब में उड़ा देने वाले लोगों को न तो कोई परिवार से लगाव रहता है और न ही समाज से कोई सरोकार रहता है। पीने वालों की जमात अब शाम होने का इन्तजार नही करती। मेहनत मजदूरी करने वाले या आटो रिक्शा चलाने वाले सुबह से ही शराब गले में उडेल लेते हैं। इस खोखली दलील से कोई इत्तिफाक नही रखता। अपना ऐब छिपाने के लिए इस तरह की बाते जो लोग करते हैं। दरअसल वे पैसा कमाने के चक्कर में या तो दूसरे को ढगते हैं या शराब के जुगाड़ में खुद सस्ते में कम कर अपनी सेहत के दुश्मन बन जाते हैं। जब पैसे की तंगी होने लगती है तो पीने वाले उधार मांगने लगते हैं। न मिले तो छोटे-मोटे जुर्म भी कर डालते हैं। जिनमें लूटपाट राहजनी या धंधे में बेमानी शामिल है। ज्यादातर औरते पति के रहते चूल्हा-चैका बर्तन या कपड़े धोने का काम इनकी पत्नियों की मजबूरी बन जाती है। बहुत औरते अपने शराबी पति को छोड किसी अन्य का दामन थाम लेती हैं। इसकी वजह से शराबियों के बच्चों को भोगना पड़ता है। शराब की अधिकता से पीने वाले फेफडे, लीवर, गुर्दा सभी अंग खराब हो जाते हैं। इन परिस्थितियों में पियक्कड को तकलीफ तो होता ही है। मौत भी बेहद दर्दनाक होती है। अगर कोई देख ले तो शराब से तौबा करने में ही अपनी भलाई समझे। वरना उसकी तथा उसके आने वाली पीढ़ी का अन्जाम बहुत बुरा होता है।
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