फतेहपुर, शमशाद खान । सहालग के दिनों में विधान सभा चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी भी वैवाहिक आयोजनों को प्रचार का साधन मान हर छोटे ब़डे समारोहों में शिरकत कर रहे है। क्षेत्र में इन दिनों प्रत्याशियों का अंदाज खुशी हो या गम साथ रहेंगे हम जैसा है। आयोजक भी मौके के अनुसार राजनीतिक शख्सियतों केा आमंत्रित कर रहे है और तो और गरीबों के आयोजन में पहुंचने वाले नेता जो तन मन धन से सहयोग भी कर रहे है। इन दिनों हर किसी के सुख दुःख में खड़ा होने की आतुर प्रत्याशियों के लिए आवार संहिता भले ही दीवार बनी हो लेकिन सहालग इस दीवार को बहाने का सुगम साधन साबित हो रहा है। शादी विवाह के आयोजनों को डाल बनाकर प्रत्याशी व समर्थक समारोहों में शामिल होकर अपनी फिजा बनाते नजर आ रहे है। यद्यपि प्रत्याशी इस बाबत एहतियात बरतते बताए जाते है कि गैर प्रत्याशी की मौजूगी न होनी की स्थिति में ही वे समारोहों में पहुंचे लेकिन बहुघा परस्पर विरोधी प्रत्याशियों का समारोह में आमना-सामना हो ही जाता है। उस स्थिति में खेेमेबाजी का नजारा भी देखने को मिलता है। नेताओं की मौजूदगी से समारोह की रौनक बढ़ने की मंशा रखने वाले आयोजक भी बेहियक नेताओं केा निमंत्रण दे रहे है। शहरी क्षेत्रों में भी ऐसा नजारा देखने को मिलता है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में मेजबान व मेहमान के परम्पर स्वाथों का संगम नेताओं के लिए पृष्ठ भूमि तैयार करने का साधन बना हुआ हैं कहना न होगा कि व्यवहारिक तौर पर समाजिक दायित्व के नाम पर प्रत्याशियों द्वारा ऐसे आयोजनों में दिये जाने वाला आर्थिक मदद संहिता के कानूनी दायरे से बाहर होता है। सो प्रत्याशी भी उदारता दिखाकर वोटरों को आकर्षित करने में लगे है। और सहालग प्रत्याशियों के लिए वोटरों का दिल जीतने का बहाना बना हुआ है।
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