फतेहपुर, शमशाद खान । देश मे 1945 से शैक्षिक सेवायें दे रहे एमआर जयपुरिया स्कूल ग्रुप ने ग्राम शिक्षा सेवा संस्थान सोसाइटी के सहयोग से शहर के मुराइन टोला मोहल्ले मे स्थित शिवबली सिंह आईटीआई के बगल मे कल (आज) से स्कूल खोलकर प्रवेश प्रारम्भ करने जा रहा है। जयपुरिया स्कूल का संचालन जिस स्थान पर कल (आज) से होने जा रहा है उस स्थान मात्र पचास कदम की दूरी पर दिन मे हर समय मौत का साया मंडराता रहता है। जयपुरिया स्कूल का संचालन जिस स्थान से होना है वहां से लगभग पचास कदम की दूरी पर ललिता इण्डेन गैस एजेन्सी का गैस वितरण का स्पाट भी है जहां पर दिन मे हर समय मौत का साया मंडराता रहता है। इतना ही नही जिस स्थान पर इस स्कूल का संचालन एक मार्च से होना है ठीक उसके पीछे गहरा कूंड तालाब है और नौनिहालों की सुरक्षा मे भी स्कूल के संचालक को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। शहर के ज्वालागंज मोहल्ले मे स्थित डेवलोमेट होटल मे कल पत्रकारों से बातचीत करते हुए जयपुरिया ग्रुप के वाइस चेयर मैन श्रीवत्स जयपुरिया ने बताया कि देश मे उनके कई जनपदों मे स्कूल संचालित है तथा एक मार्च से शहर के मुराइन टोला मोहल्ले मे स्थित शिवबली सिंह आईटीआई के बगल मे जयपुरिया स्कूल मे बच्चों के प्रवेश प्रारम्भ कर दिये जायेगे। उन्होंने कहा था कि बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के नाम पर जयपुरिया ग्रुप के स्कूलों को बेस्ट पुरस्कार भी मिल चुका है। शहर के मुराइन टोला मोहल्ले मे स्थित शिवबली सिंह आईटीआई के आगे बनी बिल्डिंग मे कल (आज) से जयपुरिया स्कूल मे बच्चों को प्रवेश प्रारम्भ हो जायेगा। जयपुरिया स्कूल से मात्र पचास कदम की दूरी पर स्थित बरगद के पेड के नीचे ललिता इण्डेन गैस एजेन्सी का गैस वितरण का स्पाट लगता है जो सुबह आठ बजे से लेकर शाम चार बजे तक संचालित रहता है। जयपुरिया स्कूल से मात्र पचास कदम की दूरी पर दिन मे हर समय मौत का साया मंडराता रहता है और किसी भी समय किसी बड़ी अप्रिय घटना के घटित होने से इंकार नही किया जा सकता है। इतना ही नही जयपुरिया स्कूल की बिल्डिंग से कब्रस्तान सटा हुआ है और पीछे गहरा कूंड तालाब है। इसके अलावा इस स्कूल मे बच्चों के खेलने कूदने का भी कोई मैदान नही है। यदि बच्चों को खेलना कूदना होगा तो वह या तो कब्रस्तान की जमीन पर खेलेगे या फिर स्कूल के पीछे बने गहरे कूंड तालाब की जमीन पर जायेगे। बहर हाल कुछ भी हो जयपुरिया प्राइमरी स्कूल का संचालन कल (आज) जहां से होना है उससे मात्र पचास कदम की दूरी पर दिन मे हर समय मंडराता रहता है मौत का साया।
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