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Wednesday, 8 February 2017

हाल-ए-जिला चिकित्सालयः कर्मचारियों की तरह काम करते हैं दलाल

फतेहपुर, शमशाद खान। हाल-ए-जिला चिकित्सालय यह है कि दलालों की दखलंदाजी हर स्थान पर रहती है। स्वास्थ्य कर्मियों के साथ इस तरह से गलबहियां कर घूमते हैं जैसे लगता है कि यह भी जिला चिकित्सालय के ही स्वास्थ्य कर्मी हैं। जबकि वह यहां पर रहकर दलाली का काम करते हैं। इन दलालों में पुरूषों के साथ-साथ कई महिलाएं भी शामिल हैं। पुरूष दलाल जिला चिकित्सालय के पुरूष विभाग में हावी रहते हैं। जबकि महिला दलाल महिला विभाग में हर समय मुस्तैद रहती हैं। हर आने वाले मरीज पर इनकी निगाहें होती हैं। 
उल्लेखनीय है कि जिला चिकित्सालय के पुरूष एवं महिला विभाग में दलाली करने वाले लोगों के चेहरे आम हो गये हैं। इन चेहरों को देखकर आम आदमी भी समझ जाता है। लेकिन दूर-दराज से उपचार कराने के लिए आने वाले मरीज और उनके तीमारदार इन दलालों के चंगुल में फंसकर अपना आर्थिक शोषण करा बैठते हैं। कभी-कभी हंगामा भी खड़ा हो जाता है तो इन दलालों के जरिए जिन स्वास्थ्य कर्मियों की जेबों में उगाही का धन पहुंचता है। वही चुपके से दलालों केा पिछवाड़े से नौ-दो ग्यारह कर आगे मोर्चा ले लेते हैं। इसीलिए इन दलालो की दखलंदाजी बराबर बनी हुयी है। पुरूष विभाग की बात करें तो ओपीडी में सुबह से ही दलालों की सक्रियता बढ़ जाती है। यह दलाल चिकित्सकों के कक्ष के अन्दर तक अपनी पैठ रखते हैं। पर्चे लेकर कुर्सियों में इस तरह से बैठ जाते हैं जैसे लगता है कि यह वार्ड ब्वाय हैं। जिन मरीजों से यह सुविधा शुुल्क लेते है उन्हे चिकित्सक को पहले ही दिखाकर अस्पताल से ही पूरी दवाएं लिखवा देते हैं। इन दलालों की इस तरह की हरकतों से कभी-कभी दूसरे मरीज और उनके तीमारदार हंगामा भी खड़ा कर देते हैं। तो चुपके से टेबिल पर पर्चा रखकर निकल जाते हैं।
वहीं महिला विभाग में महिला दलाल भी काफी समय से सक्रिय हैं। सुबह से ही पूरी तरह से फिट होकर मुस्तैद हो जाती हैं और सारा दिन यह महिला दलाल जिस मुस्तैदी के साथ महिला विभाग में डटी रहती हैं उससे ऐसा लगता है कि सही मायनों में यही महिला स्वास्थ्य कर्मी हैं। क्योंकि इतनी ईमानदारी से जो नियुक्त हैं वह भी ड्यूटी निभाते नही दिखाई देती हैं। इन महिला दलालों की निगाहें किसी गिद्ध से कम नही है। आने-जाने वाले प्रसव पीड़ित महिलाओं के साथ-साथ वह उन युवतियों पर नजर रखती हैं जो चोरी छिपे गर्भपात की फिराक में उपचार के नाम पर महिला चिकित्सालय आती हैं। ऐसे केसों को यह दूर से ही भांप लेती हैं और फिर इनके पीछे लग जाती है और उन्हे अपने चंगुल में फंसाकर प्राइवेट नर्सिंग होमों या गली कूचों में गुपचुप तरीके से चलाये जा रहे गर्भपात सेन्टरों में ले जाकर उनका काम आसान करने के साथ-साथ अपनी जेबें भरती हैं। वहीं महिला मरीजों को गुमराह कर नर्सिंग होमो में भी ले जाती हैं। जहां से इन्हें कमीशन मिलता है। इन महिला दलालों की महिला स्वास्थ्य कर्मियो से बाकायदा पूरी सांठगांठ है। अपनी कमाई का कुछ हिस्सा वह प्रतिदिन उन्हें भी देती हैं। पुरूष और महिला दलालों को ऐसा नही है कि अस्पताल का स्टाफ न जानता हो। लेकिन जानबूझकर आंखे मूंदे रहता है। सूत्रों का कहना है कि अस्पताल का स्टाफ जिस दिन चाह लेगा एक भी दलाल अस्पताल तो अस्पताल है अस्पताल के गेट पर भी नही फटक सकेगा। लेकिन ऐसा संभव नही है। क्योंकि अस्पताल के स्टाफ के लिए यह सभी दलाल सोने का अण्डा देने वाली मुर्गियां है।

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