फतेहपुर, शमशाद खान। चुनावी शोर के चलते चोरी से होने वाले बालू के खनन में लगी मशीनों तथा इसे ढ़ोने के खातिर लगे वाहनों से निकलने वाली गड़ग़ड़ाहट भारी तेज आवाज पूरे तरह से दबकर रह गयी है। जिसकी वजह से लाल सोने का काला कारोबार दिन प्रति दिन उछाल पर हैं 23 फरवरी को होने वाले मतदान को शांतिपूर्ण व निष्पक्षता के साथ सम्पन्न कराने की दिशा में पूरी की पूरी सरकारी मशीनरी सजग व सक्रिय हैं इसके अलावा इनकी निगाहों में कोई अन्य कार्य जरूरी नहीं लग रहे हैं सही भी चूंकि उच्चाधिकारियों से लेकर चुनाव आयोग का पे्रशर जो इनके ऊपर है। यदि कही से भी अतिमितता समक्ष में आयी तो इनकी खैर भी नही होगी। इसी से बचने के लिये कर्मचारी से लेकर अधिकारी अथवा पुलिस विभाग का हो हर कोई आयोग के नियमों का पालन कराने में न केवल तन-मन धन से लगा है। वरन ताकि भी लापरवाही का मामला प्रकश में आते ही इनके शरीर हरकत करने लगते है। मानों किसी ने करंट लगा दिया हो। सरकारी मशीनरी केवल चुनावी शोर के बीच काम करने में मस्त है। इसी का फायदा लाल सोने का काला कारोबार करने में सक्रिय रहने वाले लोग खूब तेजी के साथ उठाने में लगे है। इनका मानना है कि जब तक चुनावी शोर है तब तक खनन में लगे उपकरणों व बालू ढ़ोने में लगे रहने वालें वाहनों से निकलने वाली गड़ गड़ाहट की तेज आवाज किसी को सुनायी नही पड़ेगी। क्षेत्र के कुछ घाटों में सक्रिय रहने वाले लाल सोने के माफिया इसका पूरा लाभ उठाने के खातिर रात दिन एक किए हुए है। इनकी माने तो एक सप्ताह तक उनके द्वारा शुरू अवैध कार्य की तरफ किसी की निगाहे नही पहुंच सकेगी। इसके बाद तो स्वतः बंद कर दिया जाएगा। बताया जाता है कि धाता, किशनपुर, खखरेरू क्षेत्रों से हर रोज लाखो का लाल सोना निकल्ग्नेक के बाद गैर जनपदों के लिये रवाना कर दिया जाता है यह कार्य सूरज ढलने से लेकर निकलने के पहले तक पूरा हो जाता है।
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