फतेहपुर, शमशाद खान । अति पिछड़ा शोषित वंचित कल्याण संगठन के तत्वाधान मे पूर्व मुख्यमंत्री एवं समाजवादी चिंतक कर्पूरी ठाकुर की जयंती बड़े धूमधाम के साथ मनायी गयी और पिछड़े वर्ग के लोगों को एकजुट रहने का आहवान किया गया।
मंगलवार को नहर कालोनी परिसर मे पिछड़ा शोषित वंचित कल्याण संगठन द्वारा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की जयंती मनायी गयी। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन, भारत माता व कपूरी ठाकुर की प्रतिमा पर माल्र्यापण किया गया। जयंती कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रामआसरे प्रजापति ने किया व मुख्य अतिथि के रूप मे सेवा निवृत्त विद्युत लोकपाल रघू ठाकुर, आरडी पाल रहे। उपस्थित लोगांे को सम्बोधित करते हुए प्रदेश महासचिव प्रो0 मिथलेश कुमार सविता ने जननायक कर्पूरी ठाकुर के कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कर्पूरी ठाकुर आजादी की लड़ाई मे सक्रिय भूमिका निभाते हुए लगातार कई वर्षों तक जेल मे रहे तथा आजाद भारत मे किसानों, मजदूरों, महिलाओं एवं शोषित वंचित समाज को संवैधानिक अधिकार दिलाने हेतु वर्ष 1952 से लेकर 17 फरवरी 1988 तक लगातार विधानसभा व विधान परिषद, लोकसभा, राज्यसभा के सदस्य व मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए मृत्युपर्यन्त संघर्षशील रहे। कर्पूरी ठाकुर हिन्दी भाषा के बिहार मे उच्च शिक्षा प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त किया था। वर्ष 1977 मे कर्पूरी ठाकुर ने पिछड़ों के आरक्षण का कर्पूरी फार्मूला दिया जो कि भारत वर्ष के आठ प्रान्तों मे लागू है। जिलाध्यक्ष बुद्धराज धाकड़ी ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर के विचारों व सिद्धान्तों से ही सामाजिक न्याय को मजबूत कर सामाजिक सद्भाव स्थापित किया जा सकता है। केन्द्र व राज्य सरकारो ने तुष्टीकरण की नीति अपनाते हुए अति पिछड़ों की घोर उपेक्षा की है जिसे अति पिछड़ा समाज अब सहन नहीं करेगा। कार्यक्रम का संचालन जिला महामंत्री सूरजदीन विश्वकर्मा ने किया। इस मौके पर शिवसागर साहू, सतीश शिवहरे, राम नारायण सविता, प्रेमचन्द्र प्रजापति, सरोज सेन, बृजेश सोन, इन्द्रप्रकाश, राजू साहू, इन्द्रप्रकाश कश्यप, श्रीकान्त पाल, बंश गोपाल पाल, राकेश साहू, पवन सिंह सविता, दिनेश सोनी, जगत नारायण सविता, राजकुमार साहू, रामप्यारे मौर्या, सुनील कुमार मौर्या, प्यारेलाल सविता, मनोज कमलेश कुमार, विजयपाल निषाद, प्रेम बहादुर लोधी, डा0 शिवशरण प्रजापति आदि बड़ी संख्या मे पिछड़ा वर्ग समाज के लोग मौजूद रहे।

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