फतेहपुर, शमशाद खान । करोडो रूपयें लागत से बने गांव में तालाबो में धूल उड रही हैं। बिन्दकी तहसील क्षेत्र के चारो विकास खण्डो में के गाॅवों में मनरेगा के तहत कुछ तालाबों की तो खुदाई और सफाई के नाम पर प्रधानों व ग्राम सचिवों व अधिकारियों की तो जेबे भर गयी लेकिन सही ढंग से खुदाई न होने से एवम बरसात की कमी के चलते इन तालाबों में पानी नही भर सका वही चारो विकास खण्डों में करीब तीन सैकड़ा आदर्श तालाब बने है खुद ही अपनी दुर्दशा पर आॅसू बहा रहे है लेकिन न प्रधान ना ही प्राशानिक अधिकारी इस तरफ कोई ध्यान दे रहे है जब की गर्मी के मौसम की शुरूआत हो चुकी है और गाॅवो में मवेशियों के पीने के पानी की सबसे बड़ी परेशानी है वहीं गाॅवों में अगर दुर्भाग्य से आग लगने की कोई घटना हो जाती है तब पानी के लिये यही तालाब सहायक हुआ करते थे और ग्रामीणों की मदद से आग पर काबू पा लिया जाता था लेकिनद्य आज स्थिति वह है कि इन तालाबों में धूल उड रही है और करोड़ो के सरकारी धन का बन्दर बाॅट हुआ और यह आदर्श तालाब सरकार की इस योजना को मुह चिड़ा रहे है और आदर्श तालाबों की यह स्थिति एक दो गाॅवों की नही है बल्कि तहसील क्षेत्र की चारो विकास खण्डो में आदर्श तालाब तो बने लेकिन आज उनकी स्थित इनती दयनीय है की यह तालाब जो गाॅवों के वह पानी जो बरसात के दिनों में बह तर बेकार हो जाता था उसके सन्चय के उदेश्य में बनाये गये किन्तु रख रखाव के आभाव एवमद्य अधिकारियों की खाउ तमाउ नीत के चलते यह तालाबों का पानी जो गाॅवो के बहु उदेश्य के लिये था और जिससे जानवर पंक्षी की प्यास बुझती रहे लेकिन जब यह तालाब खुद ही प्यासे है तो यह उन जानवरो की क्या प्यास बुझायेगे और इतना सरकारी धन खर्च होने के बाद भी शायद ही कोई चारो विकास खण्डो का कोई ही तालाब ऐसा होगा जो मानको को पूरा कर रहा हो और जो तालाब बनने का मकसद को पूरा कर हो लगभग चारो विकास खण्डो के तालाबों पर पानी तो नही है लेकिन यह तालाब लोगों के अन्य कार्यो में जरूर इस्तेमाल हो रहे है जैसे की कही कही तालाबों में लोग जानवरों को बाॅध रहे है तो कहीं तालाबों में गाॅवों का कूड़ा तरतट डाला जा रहा है और कही अगर इन तालाबों में पानी है भी तो वह पानी इतना गन्दा व दूषित है कि उसमें दुर्गन्ध से जानवर उसके पास तक नही जाना पसन्द करते है क्योकि जिन तालाबों में पानी है वह गाॅ की गन्दी नालियों इत्यादि का होता है और यह आदर्श तालाब खुद ही सरकारी योजनायों का मजाक उड़ा रहे है।
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