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Wednesday, 1 February 2017

बसपा छोड़ किसी भी राजनैतिक दल ने ब्राम्हण समाज को नही दी तरजीह

फतेहपुर, शमशाद खान । जनपद में तेंइस फरवरी को सम्पन्न होने वाले विधानसभा चुनाव में बसपा को छोड़ कर भाजपा और कांग्रेस तथा सपा ने ब्राम्हण समाज को तरजीह नही दी है। इस बात को लेकर जिले के ब्राम्हण समाज के सगंठनों को बड़ा झटका लगा है। समाज के सगंठनो का मानना है कि कभी राजनैतिक दल सबसे पहले विधान सभा चुनाव में ब्राम्हण समाज को सबसे पहले तरजीह देते थे किन्तु इस बार के चुनाव में यह समाज पूरी तरह से हाशिए पर आ गया है। विधान सभा चुनाव में यह समाज किस राजनैतिक दल से नाता जोड़ेगा यह तो आने वाली ग्यारह मार्च की तारीख की बता पायेगी। जनपद में आगामी तेइस फरवरी को सम्पन्न होने वाले विधान सभा चुनाव में बसपा को छोड़ कर कांग्रेस और भाजपा तथा सपा ने ब्राम्हण समाज को तरजीह नही दी है। जब कि पिछली विधानसभा चुनाव में जहानाबाद से कांग्रेस ने बदंना राकेश शुक्ला को तथा भाजपा ने पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज शुक्ला और बसपा ने समीर त्रिवेदी को टिकट दिया था। वही सपा के बागी अमर सिंह की पार्टी से आदित्य पाण्डेय चुनाव लड़े थे। यह अलग बात है कि सभी ब्राम्हण समाज के प्रत्याशियो को पराजय का सामना करना पड़ा था और वहां से समाजवादी पार्टी के मदन गोपाल वर्मा ने जीत का परचम फहराया था। इस बार इस विधान सभा से राष्ट्रीय लोक दल ने पूर्व विधायक आदित्य पाण्डेय को चुनाव मैदान में उतारा हैं बहुजन समाज पार्टी ने पिछली बार की भांति इस विधान सभा चुनाव में समीर त्रिवेदी को सदर विधान सभा से प्रत्याशी बनाया है। समीर त्रिवेदी के विधान सभा से चुनाव लड़ने से सभी राजनैतिक दलो के समीकरण बिगड़ते नजर आ रहे है। बसपा छोड़ सपा और कांग्रेस तथा भाजपा ने इस समाज को तरजीह नही दी है। इस बात को लेकर यह समाज बुरी तरह से अपने आप को आहत महसूस कर रहा है विधान सभा चुनाव में ब्राम्हण समाज किस राजनैतिक दल का दामन थामेगा यह कह पाना बहुत कठिन है किन्तु इस बात का खुलाशा परिणाम आने के बाद ही हो पायेगा। हालाकि जिले की सबसे बड़ी पंचायत में ब्राम्हण समाज की राजनीत का सूरज इस बार पूरी तरह से अस्त हो चुका है। जबकि पिछली जिला पंचायत के चुनाव में ब्राम्हण समाज ने संतोष जनक दखल दी थी किन्तु इस बार के जिला पंचायत के चुनाव में आपसी खींच तान के चलते किसी भी सीट पर समाज के प्रत्याशियों को जीत नही हाशिल हुई थी। इस बात को लेकर समाज के बुद्धजीवी लोग चिन्तन और मंथन करने में जुट गये थे विधान सभा के चुनाव में क्या होता है यह तो आने वाली ग्यारह मार्च की तारीख ही बता पायेगी। 

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