फतेहपुर, शमशाद खान । रेलवे स्टेशन में सफर से आने वाले व सफर पर जाने वाले यात्रियों द्वारा नियमों को बलाए ताक रखकर जिस तरह से रेलवे ट्रैक को पार किया जाता है। उससे ऐसा लगता है कि इनके लिए कोई नियम नही है। नियम सिर्फ नियम बनकर रह गये है क्योकि इन्हें इतनी जल्दी है। जिससे इनके लिए सब कुछ जायज है।
रेलवे जान से ज्यादा अपना समय प्यारा है। रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर यूं तो एक प्लेटफार्म से दूसरे पर आने-जाने के लिए उपरिगामी सेतु बना हुआ है, लेकिन इस सेतु का प्रयोग यात्री करते ही नही है। सभी रेलवे ट्रैक पार कर अपनी जान जोखिम में डालते है। पुरूषो की तो बात छोड़िये महिलाएं भी नियम तोड़ने में आगे दिखायी देती है। छोटे-छोटे बच्चो को लेकर रेलवे ट्रैक पार करके एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर आती-जाती है। जबकि इस तरह से नियमों के विरूद्ध आने-जाने से किसी दूसरे का नुकसान नही बल्कि चूक होने पर यात्री को ही कभी अपंग तो कभी किसी को अपनी जान से ही हांथ धोना पड़ता है। इसके बाद भी लोग जागरूक नही होते है। इससे ऐसा लगता है कि यात्रियों को इतनी जल्दी रहती है कि उनके लिए सब कुछ जायज है।

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