फतेहपुर, शमशाद खान । राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत कंपनी बाग में किसानों को दिए जा रहे दो दिवसीय प्रशिक्षण का समापन हो गया। जिसमें किसानों को टिशु कल्चर केला उत्पादन की तकनीक सिखाई गई। किसानों को केले की उन्नत फसल के लिए टिशु कल्वर की बारीकियों के प्रति जागरूक किया गया। किसानो को टिशु कल्चर केला के पौधों के उत्पादन गढ़ढों की खुदाई रोपाई एवं उवर्रक प्रबंधन पर डाॅ, आरके सिंह उद्यान वैज्ञानिक के वीके थरियांव द्वारा जानकारी दी गई। केला की फसल में जैविक खादों के उपयोग के बारे में बताते हुए शब्बीर हुसेन ने बताया कि कृषकों को जैविक कम्पोस्टर तैयार करने के लिए नाडेप कम्पोस्ट बनाना चाहिए। जिससे कृषकों को उनके घर में ही खाद मिलती रहेगी। कृषि वैज्ञानिक डाॅ, नौशाद आलम द्वारा वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन तकनीक बताते हुए किसानों को आगाह किया कि खेतों से लंबे समय तक उत्पादन लेने के लिए आवश्यक है कि खेत में केचुआ हो जिसके लिए इसीनिया फेडिटा प्रजाति के केचुआ को खेतों में पालकर छोड़ दें और कार्बनिक पदार्थ होने पर केचुआ स्वयं बढ़ता जाएगा और भूमि की उवर्रता में निरंतर वृद्धि होती जाएगी।
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