अलीगढ़, 28 जनवरीः शाहजमाल स्थित अठखंभे के नाम से मशहूर ऐतिहासिक इमारत को फोटो जर्नलिस्ट मनोज अलीगढ़ी ने अपने साथियों के साथ अपने अभियान के क्रम में साफ किया। उन्होंने गुंबद पर उग रहे पेड़ों व झाड़ियों को हटाया, जो ऐतिहासिक इमारत के अस्तित्व को समाप्त करने पर लगी थीं।
बताया जाता है कि 1400 ईसवीं में दिल्ली के सुल्तान बलवन ने अलीगढ़ को फतह करने के लिए आक्रमण किया और उस हमले में जो सैनिक मारे गए थे, उनकी कब्रगाह शाहजमाल में बनवाई। ठीक 200 वर्ष बाद लगभग 1600 ईसवीं में मुगलों का राज्य आने पर शासक गेसू खां ने इस कब्रगाह के ऊपर गुंबद अपनी जीत के प्रतीक के रूप में बनवाई। जो बाद में अठखंभे के नाम से मशहूर हुई। इतिहासकारों का कहना है कि गुंबद के निर्माण में रेड सेंड स्टोन का प्रयोग किया गया, जो आगरा व जयपुर क्षेत्र में मिला करता था। खास बात ये है कि गुंबई के अंदर से विशेष तरह की नक्काशी की गई है जिसमें इस्लाम धर्म से जुड़ी आकर्षक पेंटिंग की गई है जो लगभग 400 वर्ष बीतने के बाद भी बड़ी आसानी से पढ़ी जा सकती हैं।
ऐतिहासिक इमारत होने के बावजूद अनदेखी के चलते अपना अस्तित्व खो रही इस इमारत को फोटो जर्नलिस्ट मनोज अलीगढ़ी ने अपने अभियान के क्रम में इस इमारत को साफ किया। उन्होंने कहा कि गुंबद के ऊपर झाड़ियां उग रही थीं और पेड़ गुंबद को पार कर बाहर आ रहे थे, जिसे उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ उखाड़ा। उन्हें व उनकी टीम को गुंबद की साफ करते देख क्षेत्रीय लोगों ने भी उन्हें सहयोग दिया और उनके इस कार्य की प्रशंसा की। उनके इस कृत्य को देखने के लिए आसपास की छतों व गुंबद के पास लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस मौके पर क्षेत्रीय पार्षद मुशर्रफ अली महजर ने कहा कि स्थानीय प्रशासन को ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण के लिए भी आगे आना चाहिए।
मनोज अलीगढ़ी के साथ उनकी टीम में विनीत ठाकुर, विकास यादव, रितिक वर्मा, रितुराज शर्मा, शाहरूख, रिजवान सहित क्षेत्रीय लोगों में आसिफ, रईस अहमद, ताहिर भाई, परवेज पठान, इस्लाम प्रधान जी, हबीज खां आदि क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे।

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